आस्था, समय और संयोग का दर्पण,4 मई का विस्तृत पंचांग

भारतीय जीवन परंपरा में पंचांग केवल तिथियों और समय का विवरण भर नहीं होता, बल्कि यह हमारे दैनिक निर्णयों, धार्मिक आस्थाओं और सांस्कृतिक धरोहर का महत्वपूर्ण मार्गदर्शक भी है। हर दिन का पंचांग हमें यह समझने में मदद करता है कि कौन-सा समय शुभ है, किन कार्यों से बचना चाहिए और प्रकृति तथा ग्रह-नक्षत्रों का हमारे जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है। 4 मई का दिन भी इसी दृष्टि से विशेष महत्व रखता है, जिसमें कई शुभ-अशुभ योगों का अद्भुत संयोग देखने को मिलता है।

आज ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि है, जो 5 मई की सुबह 05:24 बजे तक प्रभावी रहेगी। इसके उपरांत चतुर्थी तिथि का आरंभ होगा। नक्षत्रों की स्थिति के अनुसार अनुराधा नक्षत्र सुबह 09:58 बजे तक रहेगा, जिसके बाद ज्येष्ठा नक्षत्र प्रारंभ हो जाएगा। योग की दृष्टि से परिघ योग रात 11:20 बजे तक रहेगा, तत्पश्चात शिव योग का शुभ संयोग बनेगा।

आज सूर्य का उदय सुबह 05:38 बजे और सूर्यास्त शाम 06:58 बजे होगा। वहीं चंद्रमा रात 09:42 बजे उदित होकर सुबह 06:52 बजे अस्त होंगे। दिनमान 13 घंटे 19 मिनट 57 सेकंड का रहेगा, जबकि रात्रिमान 10 घंटे 39 मिनट 14 सेकंड का होगा। मध्याह्न का समय 12:18 बजे निर्धारित है।

करण की बात करें तो वणिज करण शाम 04:12 बजे तक रहेगा, जिसके बाद विष्टि करण अगले दिन सुबह 05:24 बजे तक प्रभावी रहेगा। फिर बव करण का आरंभ होगा। आज चंद्रमा वृश्चिक राशि में स्थित हैं, जबकि सूर्य मेष राशि में विराजमान हैं। अन्य ग्रहों की स्थिति सामान्य बनी हुई है, जो संतुलित प्रभाव का संकेत देती है।

शुभ मुहूर्तों की दृष्टि से आज का दिन कई अवसर प्रदान करता है। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04:13 से 04:55 बजे तक रहेगा, जो साधना और ध्यान के लिए सर्वोत्तम माना गया है। अभिजित मुहूर्त सुबह 11:51 से 12:45 बजे तक रहेगा, जो किसी भी महत्वपूर्ण कार्य की शुरुआत के लिए अत्यंत शुभ है। विजय मुहूर्त दोपहर 02:31 से 03:25 बजे तक और गोधूलि मुहूर्त शाम 06:57 से 07:18 बजे तक रहेगा। इसके अतिरिक्त सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 05:38 से 09:58 बजे तक रहेगा, जो सभी प्रकार के कार्यों की सफलता के लिए अनुकूल माना जाता है।

हालांकि, कुछ समय ऐसे भी हैं जिनमें सावधानी बरतना आवश्यक है। राहुकाल सुबह 07:18 से 08:58 बजे तक रहेगा, जबकि यमगण्ड 10:38 से 12:18 बजे तक प्रभावी रहेगा। गुलिक काल दोपहर 01:58 से 03:38 बजे तक रहेगा। दुर्मुहूर्त और वर्ज्य काल में भी शुभ कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है। शाम 04:12 बजे से भद्रा का आरंभ होगा, जो अगले दिन सुबह 05:24 बजे तक रहेगा—इस दौरान मांगलिक कार्यों से परहेज करना उचित होता है।

दिशा और निवास के अनुसार आज दिशा शूल पूर्व दिशा में है, अतः इस दिशा में यात्रा करने से बचना श्रेयस्कर होगा। चंद्र वास उत्तर दिशा में तथा राहु वास उत्तर-पश्चिम दिशा में स्थित है। अग्निवास आकाश में और शिववास क्रीड़ा में माने गए हैं, जो अगले दिन परिवर्तित होंगे। कुम्भ चक्र उत्तर दिशा में स्थित है, जिसे अशुभ संकेत माना जाता है।

समग्र रूप से देखा जाए तो 4 मई का पंचांग जीवन में संतुलन और सतर्कता का संदेश देता है। जहां एक ओर कई शुभ मुहूर्त नए कार्यों के लिए प्रेरित करते हैं, वहीं अशुभ काल सावधानी बरतने का संकेत देते हैं। ऐसे में विवेक और समय के उचित चयन से ही दिन को सफल और मंगलमय बनाया जा सकता है।

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