श्रद्धा और आस्था का पर्व : आज मनाई जाएगी जानकी नवमी, जानिए शुभ मुहूर्त और आज का पंचांग

आज वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखती है, क्योंकि इसी दिन मर्यादा, त्याग और पवित्रता की प्रतीक माता सीता का जन्मोत्सव जानकी नवमी (सीता जयंती) के रूप में मनाया जाता है। इस अवसर पर श्रद्धालु विधि-विधान से माता सीता और भगवान श्रीराम की पूजा कर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।

आज का पंचांग 25 अप्रैल 2026 (शनिवार)

  • तिथि: वैशाख शुक्ल पक्ष नवमी तिथि रात्रि 09 बजकर 44 मिनट तक, इसके बाद दशमी तिथि आरंभ

  • वार: शनिवार

  • विक्रम संवत: 2083

  • शक संवत: 1948

  • नक्षत्र: अश्लेषा रात्रि 11 बजकर 17 मिनट तक, उसके बाद मघा

  • योग: गंड योग रात्रि 02 बजकर 47 मिनट तक, उसके बाद वृद्धि योग

  • करण: वालव, उपरांत कौलव

  • सूर्योदय: प्रातः 05:16 बजे

  • सूर्यास्त: सायं 06:11 बजे

जानकी नवमी का शुभ मुहूर्त

  • पूजा मुहूर्त: प्रातः 11:01 बजे से दोपहर 01:38 बजे तक। इस अवधि में माता सीता और भगवान श्रीराम की पूजा करना अत्यंत फलदायी माना गया है।

आज का चौघड़िया

  • काल (हानि): प्रातः 05:16 बजे से 06:53 बजे तक
  • शुभ (उत्तम): प्रातः 06:53 बजे से 08:30 बजे तक
  • रोग (अशुभ): प्रातः 08:30 बजे से 10:07 बजे तक
  • उद्वेग (अशुभ): प्रातः 10:07 बजे से 11:43 बजे तक
  • चर (सामान्य): दोपहर 11:43 बजे से 01:20 बजे तक
  • लाभ (उन्नति): दोपहर 01:20 बजे से 02:57 बजे तक
  • अमृत (सर्वोत्तम): दोपहर 02:57 बजे से 04:34 बजे तक
  • काल (हानि): सायं 04:34 बजे से 06:11 बजे तक

शुभ समय (मुहूर्त)

  • अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:36 बजे से 12:25 बजे तक
  • ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 03:47 बजे से 04:31 बजे तक
  • अमृत काल: सायं 06:29 बजे से 08:04 बजे तक
  • विजय मुहूर्त: दोपहर 02:30 बजे से 03:22 बजे तक
  • निशिता मुहूर्त: रात्रि 11:57 बजे से 12:41 बजे तक (26 अप्रैल)
  • रवि योग: पूरे दिन

अशुभ समय

  • राहुकाल: प्रातः 08:30 बजे से 10:07 बजे तक

  • यमगण्ड: दोपहर 01:20 बजे से 02:57 बजे तक

  • गुलिक काल: प्रातः 05:16 बजे से 06:53 बजे तक

  • दिशाशूल: पूर्व दिशा
    (यदि यात्रा आवश्यक हो तो अदरक या उड़द का सेवन कर प्रस्थान करें)

शिववास

  • गौरी के साथ: सायं 06:27 बजे तक
  • इसके बाद: सभा में निवास

धार्मिक महत्व

जानकी नवमी का दिन नारी शक्ति, सहनशीलता और आदर्श जीवन मूल्यों का प्रतीक है। माता सीता का जीवन त्याग, धैर्य और धर्मपालन की प्रेरणा देता है। इस दिन व्रत, कथा और पूजा करने से दांपत्य जीवन में सुख-शांति और समृद्धि आती है।आज का दिन श्रद्धा, भक्ति और मर्यादा का संदेश लेकर आया है। ऐसे में सभी श्रद्धालु विधिपूर्वक माता सीता और भगवान श्रीराम की पूजा कर जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना करें।

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