वसंत ऋतु की मधुरता और आध्यात्मिक ऊर्जा से भरे इस रविवार को ग्रह-नक्षत्रों की चाल जीवन में विशेष संकेत दे रही है। आज वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि है, जो रात के बाद एकादशी में परिवर्तित होगी। धार्मिक मान्यता के अनुसार, दशमी युक्त एकादशी का व्रत नहीं रखा जाता, इसलिए श्रद्धालुजन 13 अप्रैल को वरुथिनी एकादशी का व्रत करेंगे। आज से पंचक का आरंभ भी हो रहा है, जो कुछ कार्यों में सावधानी बरतने का संकेत देता है।
तिथि एवं व्रत
- तिथि: वैशाख कृष्ण दशमी (रात्रि 01:17 तक), तत्पश्चात एकादशी
- एकादशी व्रत: 13 अप्रैल 2026
- एकादशी समाप्ति: 14 अप्रैल प्रातः 06:00 बजे।
- नक्षत्र: श्रवण (दोपहर 12:01 तक), तत्पश्चात धनिष्ठा
- योग: साध्य (सायं 06:08 तक), पश्चात शुभ योग
- करण: वव, उपरांत भद्रा
- चंद्रमा: मकर राशि में रात्रि 03:05 तक, तत्पश्चात कुंभ राशि में प्रवेश
- सूर्य एवं चंद्रमा का समय
- सूर्योदय: प्रातः 05:29 बजे
- सूर्यास्त: सायं 06:05 बजे
- चंद्रोदय: रात्रि 02:23 बजे
- चंद्रास्त: दोपहर 01:41 बजे
- पंचक प्रारंभ: रात्रि 03:45 बजे से
- भद्रा काल: दोपहर 12:58 से रात्रि 01:17 तक
आज का चौघड़िया (दिन)
- उद्वेग: 05:29 – 07:03 (अशुभ)
- चर: 07:03 – 08:37 (सामान्य)
- लाभ: 08:37 – 10:11 (उन्नति)
- अमृत: 10:11 – 11:46 (सर्वोत्तम)
- काल: 11:46 – 01:20 (हानि)
- शुभ: 01:20 – 02:54 (उत्तम)
- रोग: 02:54 – 04:29 (अशुभ)
- उद्वेग: 04:29 – 06:05 (अशुभ)
शुभ मुहूर्त
- अभिजीत मुहूर्त: 11:40 से 12:29 बजे
- ब्रह्म मुहूर्त: 04:00 से 04:44 बजे
अशुभ समय
- राहुकाल: 04:29 – 06:05 सायं
- यमगण्ड: 12:00 – 01:30 दोपहर
- गुलिक काल: 02:54 – 04:29 सायं। दिशाशूल : पश्चिम दिशा : (यात्रा आवश्यक हो तो दलिया या घी ग्रहण कर प्रस्थान करें)। आज से आरंभ हो रहे पंचक के कारण निर्माण, लकड़ी से जुड़े कार्य और दक्षिण दिशा की यात्रा में सावधानी बरतना शुभ माना गया है। साथ ही, एकादशी व्रत के नियमों का पालन करते हुए सही तिथि पर व्रत रखना अधिक फलदायी होता है।
धार्मिक संदेश: धर्म और ज्योतिष के अनुसार सही समय पर किए गए कार्य न केवल सफलता दिलाते हैं, बल्कि जीवन में सकारात्मक ऊर्जा भी लाते हैं। अतः आज के पंचांग के अनुसार अपने कार्यों की योजना बनाएं और शुभ फल प्राप्त करें।
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