सनातन परंपरा में तिथि, नक्षत्र और योग का विशेष महत्व माना गया है। आज ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि श्रद्धा, पूजा और पुण्य कार्यों के लिए अत्यंत शुभ मानी जा रही है। यह दिन रामलक्ष्मण द्वादशी तथा चंपक द्वादशी के रूप में भी प्रसिद्ध है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु, श्रीराम और लक्ष्मण जी की पूजा-अर्चना करने से परिवार में सुख, समृद्धि और आरोग्य की प्राप्ति होती है। आज व्यतीपात योग, रवि योग और सर्वार्थ सिद्धि योग जैसे शुभ संयोग भी बन रहे हैं, जिससे दिन का महत्व और अधिक बढ़ गया है।
तिथि एवं पंचांग विवरण
तिथि : एकादशी सुबह 6 बजकर 21 मिनट तक, इसके बाद द्वादशी तिथि
पक्ष : शुक्ल पक्ष
वार : बुधवार
नक्षत्र : चित्रा
योग : व्यतीपात योग
सूर्य एवं चंद्र संबंधित समय
सूर्योदय : सुबह 5 बजकर 25 मिनट
सूर्यास्त : शाम 7 बजकर 12 मिनट
चंद्रोदय : दोपहर 3 बजकर 51 मिनट
चंद्रास्त : 28 मई की सुबह 3 बजकर 1 मिनट
शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त : सुबह 4:03 बजे से 4:44 बजे तक
प्रातः संध्या : सुबह 4:24 बजे से 5:25 बजे तक
विजय मुहूर्त : दोपहर 2:36 बजे से 3:31 बजे तक
गोधूलि मुहूर्त : शाम 7:10 बजे से 7:31 बजे तक
निशिता मुहूर्त : रात्रि 11:58 बजे से 12:39 बजे तक
सर्वार्थ सिद्धि योग : सुबह 5:25 बजे से 5:56 बजे तक
रवि योग : सुबह 5:25 बजे से 5:56 बजे तक
अशुभ समय
राहुकाल : दोपहर 12:18 बजे से 2:02 बजे तक
यमगंड : सुबह 7:08 बजे से 8:52 बजे तक
गुलिक काल : सुबह 10:35 बजे से दोपहर 12:18 बजे तक
दुर्मुहूर्त : सुबह 11:51 बजे से 12:46 बजे तक
भद्रा की छाया : सुबह 5:25 बजे से 6:21 बजे तक
दिशा शूल : उत्तर दिशा में
धर्मशास्त्रों के अनुसार आज के दिन व्रत, दान, जप और भगवान विष्णु की आराधना विशेष फलदायी मानी जाती है। श्रद्धालु पीले वस्त्र धारण कर तुलसी एवं चंपा पुष्प अर्पित करें तो शुभ फलों की प्राप्ति होती है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार आज का सर्वार्थ सिद्धि योग एवं रवि योग नए कार्यों की शुरुआत, पूजा-पाठ और मांगलिक कार्यों के लिए अत्यंत शुभ माना गया है।
