भारतीय संस्कृति में पंचांग केवल तिथियों और ग्रह-नक्षत्रों की जानकारी भर नहीं देता, बल्कि यह हमारे जीवन के दैनिक निर्णयों और धार्मिक आचरण को भी दिशा देता है। आज चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि है और साथ ही रविवार का दिन है। आज का दिन विशेष इसलिए भी है क्योंकि आज रंग पंचमी का पर्व मनाया जा रहा है, जिसे कई स्थानों पर देवताओं की होली भी कहा जाता है। इस दिन वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा, उल्लास और आध्यात्मिकता का अद्भुत संगम देखने को मिलता है।
पंचांग के अनुसार आज पंचमी तिथि रात 9 बजकर 11 मिनट तक रहेगी, इसके बाद षष्ठी तिथि का आरंभ होगा। आज पहले स्वाती नक्षत्र का प्रभाव रहेगा, जो दोपहर 1 बजकर 31 मिनट तक रहेगा, इसके पश्चात विशाखा नक्षत्र प्रारंभ होगा। ज्योतिषीय दृष्टि से यह दिन कई महत्वपूर्ण योगों और संयोगों से युक्त है, जो साधना, दान और शुभ कार्यों के लिए अनुकूल माने जाते हैं।
पंचांग विवरण
- तिथि – पंचमी रात 9:11 बजे तक, इसके बाद षष्ठी तिथि
- वार – रविवार
- पक्ष – कृष्ण पक्ष
- पूर्णिमांत मास – चैत्र
- अमांत मास – फाल्गुन
संवत
- विक्रम संवत – 2083 (सिद्धार्थि)
- शक संवत – 1947 (विश्वावसु)
नक्षत्र
- स्वाती नक्षत्र – दोपहर 01:31 बजे तक
- इसके बाद विशाखा नक्षत्र
करण
- कौलव – सुबह 08:11 बजे तक
- तैतिल – सुबह 08:11 बजे से रात 09:11 बजे तक
- इसके बाद गर करण
योग
- ध्रुव योग – सुबह 07:03 बजे तक
- इसके बाद व्याघात योग
विशेष योग
- सर्वार्थसिद्धि योग – सुबह 06:46 बजे तक
सूर्य और चंद्रमा का समय
- सूर्योदय – सुबह 06:46 बजे
- सूर्यास्त – शाम 06:29 बजे
- चंद्रोदय – रात 11:02 बजे
- चंद्रास्त – 9 मार्च सुबह 09:58 बजे
सूर्य राशि – कुंभ
चंद्र राशि – तुला
आज के शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त – सुबह 05:09 बजे से 05:57 बजे तक
- अमृत काल – सुबह 06:23 बजे से 08:10 बजे तक
- अभिजीत मुहूर्त – दोपहर 12:14 बजे से 01:01 बजे तक। ये समय विशेष रूप से पूजा, जप, ध्यान, दान या किसी शुभ कार्य के आरंभ के लिए अनुकूल माने जाते हैं।
आज के अशुभ मुहूर्त
- राहुकाल – शाम 05:01 बजे से 06:29 बजे तक
- यमगण्ड – दोपहर 12:37 बजे से 02:05 बजे तक
- कुलिक काल – दोपहर 03:33 बजे से 05:01 बजे तक
- दुर्मुहूर्त – शाम 04:55 बजे से 05:42 बजे तक
- वर्ज्यम् – रात 07:44 बजे से 09:31 बजे तक। इन समयों में महत्वपूर्ण कार्य आरंभ करने से बचना बेहतर माना जाता है।
आज रंग पंचमी का पर्व मनाया जा रहा है। होली के पाँचवें दिन मनाया जाने वाला यह उत्सव विशेष रूप से मध्य भारत और उत्तर भारत के कई क्षेत्रों में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन देवता भी रंगों से होली खेलते हैं, इसलिए इसे देवताओं की होली कहा जाता है।
रंग पंचमी केवल रंगों का उत्सव नहीं बल्कि नकारात्मकता को दूर कर जीवन में आनंद और सकारात्मकता लाने का प्रतीक भी है। इस दिन घरों में पूजा-पाठ, भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की आराधना तथा परस्पर रंग-गुलाल लगाकर शुभकामनाएं देने की परंपरा है।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब रविवार के दिन स्वाती नक्षत्र का संयोग बनता है, तो यह विशेष रूप से आत्मबल, साहस और नई शुरुआत का संकेत देता है। यह समय व्यक्ति को अपने जीवन में चल रही बाधाओं से बाहर निकलने और नई दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।ऐसे समय में दान, जप, तप, सूर्य उपासना और ध्यान करना अत्यंत फलदायी माना गया है। विशेष रूप से प्रातःकाल सूर्य को अर्घ्य देने से मानसिक शांति, ऊर्जा और सकारात्मकता की प्राप्ति होती है।
