आज का पंचांग: 20 मार्च 2026, सर्वार्थ सिद्धि योग पूरे दिन विद्यमान रहेगा

चैत्र मास का शुभारंभ भारतीय संस्कृति में नवजीवन, नवसंकल्प और आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। चैत्र शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि के साथ नवरात्रि का दूसरा दिन विशेष महत्व रखता है, जब श्रद्धालु मां दुर्गा के ब्रह्मचारिणी स्वरूप की पूजा कर तप, संयम और साधना का संदेश ग्रहण करते हैं। यह दिन न केवल धार्मिक दृष्टि से, बल्कि जीवन में अनुशासन और धैर्य की प्रेरणा देने वाला भी है। साथ ही झूलेलाल जयंती, शुक्रवार व्रत और लक्ष्मी पूजन का संयोग इसे और अधिक पावन बना देता है।

तिथि, वार व संवत
तिथि: चैत्र शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि 21 मार्च 2026 को प्रातः 03:47 बजे तक रहेगी, तत्पश्चात तृतीया तिथि प्रारंभ होगी।
वार: शुक्रवार
विक्रम संवत: 2083
शक संवत: 1948
सूर्योदय: प्रातः 05:53 बजे
सूर्यास्त: सायं 06:00 बजे

नक्षत्र, योग व करण :  नक्षत्र: रेवती (प्रातः 03:41 बजे तक), उपरांत अश्विनी।  योग: ब्रह्म (रात्रि 11:32 बजे तक), उपरांत ऐंद्र। करण: बालव, उपरांत कौलव।

आज का दिन विशेष रूप से शुभ संयोगों से युक्त है। सर्वार्थ सिद्धि योग पूरे दिन विद्यमान रहेगा, जो किसी भी शुभ कार्य के लिए अत्यंत अनुकूल माना जाता है। वहीं अमृत सिद्धि योग प्रातः 06:25 बजे से देर रात्रि तक रहेगा, जो सफलता और सिद्धि प्रदान करने वाला है।

आज का चौघड़िया
चर (सामान्य): प्रातः 05:53 बजे से 07:24 बजे तक
लाभ (उन्नति): प्रातः 07:24 बजे से 08:54 बजे तक
अमृत (सर्वोत्तम): प्रातः 08:54 बजे से 10:25 बजे तक
काल (हानि): प्रातः 10:25 बजे से 11:55 बजे तक
शुभ (उत्तम): दोपहर 11:55 बजे से 01:26 बजे तक
रोग (अशुभ): दोपहर 01:26 बजे से 02:57 बजे तक
उद्वेग (अशुभ): दोपहर 02:57 बजे से 04:27 बजे तक
चर (सामान्य): सायं 04:27 बजे से 06:00 बजे तक

आज के शुभ मुहूर्त
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:31 बजे से 12:19 बजे तक
विजय मुहूर्त: दोपहर 01:56 बजे से 02:43 बजे तक

आज के अशुभ समय
राहुकाल: प्रातः 10:25 बजे से 11:55 बजे तक
यमगण्ड: दोपहर 02:57 बजे से 04:27 बजे तक
गुलिक काल: प्रातः 07:24 बजे से 08:54 बजे तक
दिशाशूल: पश्चिम दिशा (यात्रा से पूर्व दही या जौ का सेवन शुभ रहेगा) पंचक: आज पंचक प्रभावी है।

शिववास : गौरी के साथ – रात्रि 02:30 बजे तक, तत्पश्चात सभा में।

नोट: नवरात्रि का यह दूसरा दिन मां ब्रह्मचारिणी की उपासना के माध्यम से तप, संयम और दृढ़ संकल्प का संदेश देता है। यह दिन हमें सिखाता है कि कठिनाइयों के बीच भी धैर्य और विश्वास बनाए रखना ही सच्ची साधना है। शुभ योगों के इस संगम में किया गया हर सकारात्मक प्रयास जीवन में सफलता और संतुलन की ओर अग्रसर करता है।

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