हापुड। केंद्रीय बजट 2026 पेश होते ही किसान संगठनों में रोष की लहर दौड़ गई। देश भर के जूझते किसानों को सीधी आर्थिक राहत की उम्मीद थी, लेकिन वित्त मंत्री ने भाषण में नारियल, काजू, चंदन जैसी चुनिंदा फसलों और डिजिटल कृषि योजनाओं का जिक्र तो किया, पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी, पीएम किसान सम्मान निधि में बढ़ोतरी या कृषि यंत्रों पर व्यापक सब्सिडी जैसे मूल मुद्दों पर खामोशी बरती।भारतीय किसान यूनियन लोक शक्ति के प्रदेश उपाध्यक्ष आबिद हुसैन ने बजट को किसान-विरोधी करार देते हुए कड़ा बयान जारी किया।
उन्होंने कहा, "1 फरवरी 2026 को पेश केंद्रीय बजट से देश का किसान वर्ग बड़ी उम्मीद लगाए बैठा था, लेकिन यह बजट किसानों की उम्मीदों पर खरा नहीं उतर सका। खेती की बढ़ती लागत, गिरती आय और बाजार की मार से जूझ रहे किसानों को इस बजट से सीधी आर्थिक राहत की अपेक्षा थी, जो पूरी तरह गायब रही।"हुसैन ने आगे जोर देकर कहा, "किसानों को आशा थी कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की राशि बढ़ेगी, कृषि यंत्रों पर सब्सिडी का दायरा विस्तृत होगा और सबसे अहम न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी पर सरकार कोई ठोस फैसला लेगी। लेकिन बजट भाषण में इन मूल मुद्दों पर केवल चुप्पी दिखाई दी। नारियल, काजू, चंदन जैसी चुनिंदा फसलों, डिजिटल कृषि और 'भारत विस्तार' जैसी एआई आधारित योजनाओं की घोषणाएँ की गईं, पर यह सच्चाई है कि तकनीक से पेट नहीं भरता और ऐप से घाटा नहीं रुकता। जब तक किसानों को लागत का पूरा मूल्य, एमएसपी की गारंटी और नकद सहायता नहीं मिलेगी, तब तक ऐसी योजनाएँ कागज़ी साबित होंगी।"उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, "यह बजट एक बार फिर साबित करता है कि किसान देश की रीढ़ तो है, लेकिन बजट की प्राथमिकता नहीं। सरकार को समझना होगा कि किसान अब आश्वासन नहीं, अधिकार और गारंटी चाहता है। यदि किसानों की उपेक्षा यूँ ही जारी रही, तो इसका जवाब खेतों से लेकर सड़कों तक साफ दिखाई देगा।"भारतीय किसान यूनियन लोक शक्ति के मेरठ मंडल मीडिया प्रभारी फैजान चौधरी ने भी बजट की आलोचना करते हुए कहा, "यह बजट किसानों के साथ छलावा है। नारियल-काजू जैसी फसलों का जिक्र करके मुख्य मांगों MSP गारंटी और पीएम किसान में बढ़ोतरी को नजरअंदाज कर दिया गया। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसान पहले ही मंडी की लूट और कर्ज के जाल में फंसे हैं। सरकार को तत्काल MSP कानून बनाना चाहिए, वरना आंदोलन की चिंगारी पूरे देश में फैल जाएगी।"उत्तर प्रदेश के आगरा जैसे कृषि-प्रधान क्षेत्रों में किसान पहले ही कम उत्पादन लागत, बेमौसम बारिश और बाजार की अनिश्चितता से त्रस्त हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बिना MSP गारंटी के किसानों की आय दोगुनी करने का सरकारी लक्ष्य कागजों तक सीमित रह जाएगा। किसान संगठन आंदोलन की तैयारी में जुटे हैं।
