नई शुरुआत के साथ शिव-आराधना का विशेष दिन : आज धार्मिक दृष्टि और ज्योतिषीय गणनाओं दोनों से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पूर्णिमांत पद्धति के अनुसार आज से हिंदू पंचांग के अंतिम मास फाल्गुन की विधिवत शुरुआत हो रही है। दिन की शुरुआत कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि से हो रही है, जबकि चंद्रमा दिन में कर्क राशि और रात में सिंह राशि में संचरण करेंगे। तिथि, नक्षत्र, योग एवं करण
- तिथि: कृष्ण प्रतिपदा — 3 फरवरी, प्रातः 01:52 बजे तक; इसके बाद कृष्ण द्वितीया।
- नक्षत्र: दिन में अश्लेशा (रात्रि 10:47 तक), तत्पश्चात मघा।
- योग:
- प्रातः 07:21 तक आयुष्मान योग,
- इसके बाद सौभाग्य योग (3 फरवरी, प्रातः 04:46 तक),
- तत्पश्चात शोभन योग।
- करण:
- दोपहर 02:41 तक बालव,
- इसके बाद कौलव (3 फरवरी, 01:52 तक),
- तत्पश्चात तैतिल।
- विक्रम सम्वत: 2082 (कालयुक्त)
- शक सम्वत: 1947 (विश्वावसु)
- गुजराती सम्वत: 2082 (पिंगल)
- चन्द्र मास:
- पूर्णिमांत — फाल्गुन
- अमांत — माघ
- सूर्योदय: प्रातः 07:09 बजे
- सूर्यास्त: सायं 06:01 बजे
- चन्द्रोदय: सायं 06:33 बजे
- चन्द्रास्त: अगले दिन प्रातः 07:27 बजे
- चन्द्रमा: दिन में कर्क, रात्रि 10:47 के बाद सिंह राशि।
- सूर्य: मकर राशि में स्थिर।
- सूर्य नक्षत्र: श्रवण
- चन्द्र नक्षत्र: अश्लेशा → मघा
- ऋतु: शिशिर
- अयन: उत्तरायण
- दिनमान: लगभग 10 घंटे 52 मिनट
- रात्रिमान: लगभग 13 घंटे 07 मिनट
- मध्याह्न काल: 12:35 बजे
आज के शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त: 05:24 – 06:16
- प्रातः सन्ध्या: 05:50 – 07:09
- अभिजित मुहूर्त: 12:13 – 12:57
- विजय मुहूर्त: 02:24 – 03:07
- गोधूलि मुहूर्त: 05:59 – 06:25
- सायाह्न सन्ध्या: 06:01 – 07:20
- अमृत काल: 09:16 – 10:47
- निशिता मुहूर्त: 12:08 – 01:01 (3 फरवरी)
अशुभ मुहूर्त
- राहुकाल: 08:30 – 09:52
- यमगण्ड: 11:13 – 12:35
- गुलिक काल: 01:56 – 03:18
- दुर्मुहूर्त: 12:57 – 01:40 तथा 03:07 – 03:51
- वर्ज्य काल: 12:08 – 01:39
- आडल योग: रात्रि 10:47 से 3 फरवरी प्रातः 07:08 तक
- गण्ड मूल: पूरे दिन
- बाण: मृत्यु बाण — प्रातः 07:35 से पूरी रात
- दिशा शूल: पूर्व दिशा (इस दिशा में शुभ कार्य टालें)
- चन्द्र वास:
- दिन में उत्तर,
- रात में पूर्व
- राहु वास: उत्तर-पश्चिम
- शिववास: भगवान शिव सभा में विराजमान — शास्त्रों के अनुसार इस स्थिति में रुद्राभिषेक वर्जित माना जाता है।
- शुभ कार्य अमृत काल, अभिजित और विजय मुहूर्त में करें।
- राहुकाल, यमगण्ड और दुर्मुहूर्त में मांगलिक कार्य टालें।
- शिव पूजा करें, पर सभा शिववास का ध्यान रखें।
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