हरियाणा कमेटी का बजट पास होने के बाद गुरुद्वारों के धार्मिक प्रचार और मैनेजमेंट का काम तेज़ होगा
कालांवाली (सुरेश जोरासिया)। हरियाणा सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी का बजट पास होने में पूर्व प्रधान बलजीत सिंह दादूवाल रुकावट डाल रहे हैं। जिससे हरियाणा कमेटी के सारे कामकाज प्रभावित हो रहे हैं। बजट पास हुए बिना कमेटी कोई काम नहीं करवा सकती। यह बात हरियाणा सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी के प्रधान जत्थेदार जगदीश सिंह झींडा ने आज गांव पाना में गुरुद्वारा श्री कलगीधर साहिब में साहिबज़ादा अजीत सिंह की जयंती पर आयोजित प्रोग्राम में हिस्सा लेने से पहले पत्रकारों से बात करते हुए कही।
जत्थेदार जगदीश सिंह झीडा गांव पाना में गुरुद्वारा श्री कलगीधर साहिब में सिख संगत को संबोधित करते हुए।
इस मौके पर हरियाणा कमेटी के सदस्य भाई बिंदर सिंह खालसा,अमृतपाल सिंह ओढ़ा और कुलदीप सिंह जोगेवाला के साथ-साथ पूर्व एसजीपीसी सदस्य जगदेव सिंह मटदादू, जत्थेदार हरबंस सिंह पाना, परमजीत सिंह खालसा, जत्थेदार जगराज सिंह खोखर, जगतार सिंह तारी और कई पंथक नेता मौजूद थे।जत्थेदार जगदीश सिंह झींडा ने कहा कि बलजीत सिंह दादूवाल ने कमेटी का बजट पास करने के खिलाफ गुरुद्वारा कमिशन में अपनी शिकायत दर्ज कराई है। जिससे हरियाणा कमेटी को कार्य करने में दिक्कतें आ रही हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बलजीत सिंह दादूवाल ने अपने कार्यकाल में बहुत गैर-कानूनी खर्चे किए हैं, अब हम संगत की मदद से उनका हिसाब लेंगे। इसके अलावा जब वे धर्म प्रचार कमेटी के चेयरमैन थे, तो उन्होंने गुरु घर के पैसे लेकर बहुत बड़े खर्चे किए थे, जो उन्हें नहीं करने चाहिए थे। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में बजट पास होने के बाद हरियाणा कमेटी धर्म प्रचार की लहर को और तेज करेगी। इसके अलावा गुरुद्वारों के प्रबंधों को बेहतर किया जाएगा। उन्होंने यह भी दावा किया कि इस समय उनके साथ 35 सदस्य हैं, जो हरियाणा कमेटी के अच्छे कार्यों में उनका पूरा साथ दे रहे हैं। दीदार सिंह नलवी के बारे में पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि सरदार नलवी प्रधान बनना चाहते हैं लेकिन मैं उन्हें प्रधान नहीं बना सकता, बल्कि चुने हुए सदस्य ही उन्हें प्रधान बना सकते हैं। अगर उनके पास बहुमत है तो उन्हें प्रधान बनने से कोई नहीं रोक सकता।
इस दौरान जत्थेदार जगदीश सिंह झींडा ने गुरुद्वारा श्री कलगीधर साहिब में मौजूद सिख संगत को संबोधित करते हुए कहा कि हमें अपनी मातृभाषा पंजाबी के सम्मान और प्रचार-प्रसार के लिए काम करना चाहिए। हमें अपने घरों में पंजाबी बोलनी चाहिए ताकि हमारी आने वाली पीढिय़ां पंजाबी भाषा से जुड़ी रहें। उन्होंने कहा कि हम अपने बच्चों के भविष्य के लिए चाहे कोई भी भाषा सिखाएं, पंजाबी भाषा को प्राथमिकता के आधार पर सिखाना चाहिए।
