गायत्री मंत्र: जन-जन की चेतना और राष्ट्र परिवर्तन की शक्ति

विनोद कुमार झा

भारतीय संस्कृति की आत्मा मंत्रों में बसती है, और उन मंत्रों में भी यदि किसी एक का सर्वाधिक व्यापक, सार्वकालिक और सार्वभौमिक प्रभाव रहा है, तो वह है गायत्री मंत्र। “गायत्री मंत्र जन-जन की चेतना, यही राष्ट्र परिवर्तन की शक्ति है”  केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का यह कथन केवल एक आध्यात्मिक उद्घोष नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता की उस गहरी समझ का प्रतीक है, जिसमें व्यक्ति की चेतना से ही राष्ट्र की दिशा और दशा तय होती है।

गायत्री मंत्र का मूल भाव बुद्धि के प्रबोधन में निहित है। “धियो यो नः प्रचोदयात्” अर्थात हमारी बुद्धि को प्रेरित करने की प्रार्थना। यह मंत्र किसी संप्रदाय, वर्ग या मत की सीमाओं में बंधा नहीं है, बल्कि यह मानव मात्र को विवेक, सद्बुद्धि और नैतिकता के पथ पर अग्रसर करने का आह्वान करता है। जब किसी राष्ट्र के नागरिक विवेकपूर्ण, कर्तव्यनिष्ठ और नैतिक रूप से जागरूक होते हैं, तब स्वतः ही राष्ट्र परिवर्तन की प्रक्रिया आरंभ हो जाती है।

आज के समय में जब वैश्वीकरण, तकनीकी विकास और भौतिक प्रगति ने जीवन को तीव्र गति दी है, वहीं मानसिक तनाव, नैतिक विचलन और सामाजिक विघटन जैसी चुनौतियाँ भी बढ़ी हैं। ऐसे दौर में गायत्री मंत्र केवल एक धार्मिक पाठ नहीं, बल्कि मानसिक अनुशासन और सामाजिक संतुलन का माध्यम बनकर उभरता है। यह व्यक्ति को आत्मकेंद्रित होने से निकालकर समाज और राष्ट्र के प्रति उत्तरदायी बनाता है।

अमित शाह का यह कथन इस दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है कि वे राष्ट्र निर्माण को केवल नीतियों, योजनाओं या प्रशासनिक ढांचे तक सीमित नहीं मानते, बल्कि उसके मूल में सांस्कृतिक चेतना को स्वीकार करते हैं। भारत का इतिहास साक्षी है कि जब-जब समाज ने अपनी सांस्कृतिक जड़ों से शक्ति प्राप्त की, तब-तब उसने बाहरी आक्रमणों, आंतरिक विघटन और कठिन परिस्थितियों का सामना मजबूती से किया।

गायत्री मंत्र का सामूहिक जप, उसका शिक्षण संस्थानों, परिवारों और सामाजिक संगठनों में प्रसार, केवल आध्यात्मिक वातावरण ही नहीं बनाता, बल्कि एक संस्कारवान नागरिक का निर्माण करता है। ऐसा नागरिक जो अधिकारों के साथ कर्तव्यों को भी समझता है, जो व्यक्तिगत स्वार्थ से ऊपर उठकर राष्ट्रहित को प्राथमिकता देता है।

यह भी सत्य है कि आधुनिक लोकतंत्र में राष्ट्र परिवर्तन केवल सत्ता परिवर्तन से संभव नहीं होता। उसके लिए आवश्यक है विचारों का परिवर्तन, दृष्टिकोण की शुद्धता और चेतना की जागृति। गायत्री मंत्र इसी चेतना का प्रतीक है। यह अंधकार से प्रकाश की ओर, अज्ञान से ज्ञान की ओर और स्वार्थ से सेवा की ओर ले जाने वाला मार्ग प्रशस्त करता है।

अतः अमित शाह का यह कथन एक संदेश है कि यदि भारत को सशक्त, समरस और आत्मनिर्भर राष्ट्र बनाना है, तो उसकी शुरुआत व्यक्ति के अंतर्मन से करनी होगी। गायत्री मंत्र उस आंतरिक परिवर्तन की कुंजी है, जो जन-जन की चेतना को जाग्रत कर राष्ट्र परिवर्तन की सशक्त शक्ति बन सकती है।

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