विनोद कुमार झा
अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर में रामलला के विग्रह की प्राण-प्रतिष्ठा की दूसरी वर्षगांठ केवल एक धार्मिक अवसर नहीं, बल्कि भारत की सभ्यतागत चेतना, सांस्कृतिक निरंतरता और राष्ट्रीय संकल्प का प्रतीक बनकर उभरी है। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रमों और नेताओं के वक्तव्यों ने यह स्पष्ट किया कि राम मंदिर आंदोलन को अब केवल अतीत की घटना के रूप में नहीं, बल्कि भविष्य की दिशा तय करने वाले ऐतिहासिक अध्याय के रूप में देखा जा रहा है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने राम मंदिर आंदोलन को “महान इतिहास” बताते हुए कहा कि इसने भारत के भविष्य की नींव रखी है। उनका यह कथन इस बात को रेखांकित करता है कि यह आंदोलन केवल एक धार्मिक संघर्ष नहीं था, बल्कि देश की आत्मा से जुड़ा विषय था। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए भगवान राम के आदर्शों विनम्रता, करुणा और आवश्यकता पड़ने पर अधर्म के विरुद्ध कठोरता को भारतीय सेना की कार्रवाई से जोड़ा। यह संदेश देता है कि भारत अपनी परंपराओं से प्रेरणा लेते हुए आधुनिक चुनौतियों का सामना कर रहा है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस अवसर को “हमारी आस्था और परंपराओं का एक दिव्य उत्सव” बताया। उनके शब्दों में रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा केवल मंदिर निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देशवासियों के हृदय में सेवा, समर्पण और करुणा की भावना को सुदृढ़ करने का माध्यम है। प्रधानमंत्री का यह दृष्टिकोण राम मंदिर को आध्यात्मिक शक्ति के साथ-साथ आत्मनिर्भर और समृद्ध भारत के निर्माण से जोड़ता है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या के ऐतिहासिक संघर्षों और सुरक्षा चुनौतियों की याद दिलाते हुए कहा कि यह नगरी शौर्य, आस्था और सुरक्षा का संदेश देती है। 2005 की आतंकी घटना का उल्लेख करते हुए उन्होंने यह स्पष्ट किया कि अयोध्या केवल धार्मिक केंद्र नहीं, बल्कि राष्ट्रीय संकल्प और साहस का प्रतीक भी है। साथ ही, उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में अयोध्या से जुड़े ऐतिहासिक क्षणों को याद करते हुए कहा कि ये तिथियां स्वतंत्र भारत के इतिहास में सदैव स्मरणीय रहेंगी।समग्र रूप से देखें तो राम मंदिर की दूसरी वर्षगांठ यह संदेश देती है कि भारत अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहते हुए आगे बढ़ रहा है। आस्था और परंपरा के साथ-साथ मर्यादा, सुरक्षा और विकास का संतुलन ही आज के भारत की पहचान बन रहा है। अयोध्या से उठती यह चेतना पूरे देश को एकता, आत्मविश्वास और भविष्य के प्रति आशावाद का मार्ग दिखाती है।
