77वें गणतंत्र दिवस की परेड में उभरता नया भारत

विनोद कुमार झा

77वां गणतंत्र दिवस केवल एक संवैधानिक उत्सव नहीं, बल्कि भारत की विकास यात्रा, सांस्कृतिक आत्मविश्वास और सैन्य सामर्थ्य का जीवंत प्रदर्शन बनकर कर्तव्य पथ पर सामने आया। ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे होने की ऐतिहासिक थीम पर आधारित यह समारोह भारत की राष्ट्रभावना, संप्रभुता और वैश्विक भूमिका के नए आयामों को रेखांकित करता है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के नेतृत्व में आयोजित इस भव्य परेड ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि भारत न केवल अपनी विरासत पर गर्व करता है, बल्कि भविष्य की चुनौतियों के लिए भी पूरी तरह तैयार है।

वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती प्रतिष्ठा : यूरोपीय काउंसिल के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपियन कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन की मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थिति भारत–यूरोप संबंधों की गहराई और भारत की बढ़ती वैश्विक स्वीकार्यता का प्रतीक रही। यह परेड कूटनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण रही, जिसने भारत को एक विश्वसनीय रणनीतिक साझेदार के रूप में स्थापित किया।

सैन्य शक्ति का आत्मनिर्भर प्रदर्शन : इस वर्ष की परेड का सबसे बड़ा आकर्षण ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में इस्तेमाल की गई हथियार प्रणालियों और नई सैन्य इकाइयों का प्रदर्शन रहा। टी-90 भीष्म टैंक, अर्जुन एमके-1, नाग मिसाइल सिस्टम, आकाश वेपन सिस्टम और MRSAM जैसे आधुनिक हथियार भारत की रक्षा तैयारियों को दर्शाते हैं।

विशेष रूप से डीआरडीओ द्वारा विकसित लॉन्ग रेंज एंटी-शिप मिसाइल (LR-AShM) का प्रदर्शन भारत की तकनीकी छलांग का प्रमाण है। हाइपरसोनिक मिसाइल तकनीक में भारत का प्रवेश यह संकेत देता है कि देश अब केवल रक्षा उपकरणों का उपभोक्ता नहीं, बल्कि उच्च स्तरीय रक्षा नवाचारों का निर्माता भी है।

तीनों सेनाओं का समन्वित सामर्थ्य : वायुसेना के राफेल, सुखोई, मिग-29 और जगुआर विमानों की ‘सिंदूर फॉर्मेशन’ उड़ान ने आकाश में भारत की वायु शक्ति का प्रभावशाली संदेश दिया। थलसेना के स्पेशल फोर्सेस, ऑल-टेरेन व्हीकल्स और हाई मोबिलिटी रिकॉनैसेंस व्हीकल (HMRV) ने आधुनिक युद्ध की आवश्यकताओं के अनुरूप भारत की तत्परता को दर्शाया। नौसेना की झांकी में आईएनएस विक्रांत का प्रदर्शन समुद्री सुरक्षा और हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की निर्णायक भूमिका को रेखांकित करता है।

परंपरा और आधुनिकता का अद्भुत संगम : 61वीं कैवेलरी की घुड़सवार टुकड़ी, बीएसएफ का ऊंट दस्ता, हिम योद्धा दस्ता, बैक्ट्रियन ऊंट, ज़ांस्करी पोनी और स्वदेशी नस्लों के प्रशिक्षित कुत्तों की उपस्थिति ने यह दिखाया कि भारत अपनी परंपराओं को आधुनिक सैन्य संरचना के साथ सहेजने में सक्षम है। यह संगम भारत की सांस्कृतिक निरंतरता और सैन्य अनुशासन का प्रतीक है।

राज्यों की झांकियों में समावेशी विकास की झलक : मणिपुर से गुजरात, केरल से जम्मू-कश्मीर तक राज्यों की झांकियों ने एक भारत–श्रेष्ठ भारत की भावना को जीवंत किया। इन झांकियों में लोक संस्कृति, विकास परियोजनाएं, सामाजिक समरसता और क्षेत्रीय विशिष्टताओं का समावेश यह दर्शाता है कि भारत का विकास मॉडल समावेशी और बहुआयामी है।

ड्रोन शक्ति और भविष्य का युद्ध : ड्रोन शक्ति और इंटीग्रेटेड ऑपरेशन सेंटर का प्रदर्शन यह संकेत देता है कि भारत भविष्य के युद्धों के स्वरूप को समझते हुए तकनीक-आधारित सुरक्षा रणनीति अपना रहा है। यह न केवल सीमाओं की सुरक्षा को मजबूत करता है, बल्कि आपदा प्रबंधन और आंतरिक सुरक्षा में भी सहायक सिद्ध होगा।

77वें गणतंत्र दिवस की परेड ने यह स्पष्ट कर दिया कि भारत आज आत्मनिर्भर, आत्मविश्वासी और वैश्विक नेतृत्व की ओर अग्रसर राष्ट्र है। ‘वंदे मातरम’ की गूंज के साथ कर्तव्य पथ से उठता यह संदेश केवल सैन्य शक्ति का नहीं, बल्कि राष्ट्रीय संकल्प, एकता और भविष्य के प्रति आशा का उद्घोष है। यह परेड भारत के लोकतंत्र की जीवंतता और संविधान में निहित मूल्यों के प्रति अटूट आस्था का सशक्त प्रतीक बनकर इतिहास में दर्ज हो गई।

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