शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक साधना के साथ आगे बढ़ रहा है। सोमवार, 12 अक्टूबर को नवरात्रि के दूसरे दिन मां दुर्गा के द्वितीय स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना की जाएगी। मां ब्रह्मचारिणी तपस्या, त्याग, संयम और दृढ़ संकल्प की प्रतीक हैं। धार्मिक मान्यता है कि उनकी आराधना से भक्तों को कठिन परिस्थितियों का सामना करने का साहस, मन की एकाग्रता और अपने लक्ष्य के प्रति अडिग रहने की प्रेरणा मिलती है। इस दिन श्रद्धालु विधि-विधान से मां की पूजा कर परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की कामना करेंगे।
पंचांग के अनुसार, आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि रात्रि 10 बजकर 13 मिनट तक रहेगी, जिसके बाद तृतीया तिथि आरंभ होगी। स्वाती नक्षत्र दिन-रात रहेगा। विष्कुम्भ योग रात्रि 8 बजकर 32 मिनट तक रहेगा, इसके बाद प्रीति योग का आरंभ होगा। बालव करण सुबह 9 बजकर 48 मिनट तक रहेगा, तत्पश्चात कौलव करण लगेगा। चंद्रमा पूरे दिन तुला राशि में संचार करेगा। दिन में अभिजीत मुहूर्त और अमृत काल के साथ कई शुभ-अशुभ समय भी रहेंगे। ऐसे में धार्मिक परंपराओं के अनुसार शुभ कार्यों की योजना बनाते समय पंचांग के समयों पर ध्यान देना उपयोगी रहेगा।
आज की तिथि और पंचांग
- दिन: सोमवार
- मास: आश्विन
- पक्ष: शुक्ल पक्ष
- तिथि: द्वितीया रात्रि 10:13 बजे तक, इसके बाद तृतीया।
- नक्षत्र: स्वाती, दिन-रात।
- योग: विष्कुम्भ रात्रि 08:32 बजे तक, इसके बाद प्रीति योग।
- करण: बालव सुबह 09:48 बजे तक, इसके बाद कौलव करण।
- चंद्र राशि: तुला।
- पर्व: शारदीय नवरात्रि का दूसरा दिन, मां ब्रह्मचारिणी की पूजा।
सूर्य और चंद्रमा की स्थिति
- सूर्योदय: सुबह 06:20 बजे।
- सूर्यास्त: शाम 05:55 बजे।
- चंद्रोदय: सुबह 07:51 बजे।
- चंद्रास्त: शाम 06:36 बजे।
आज के शुभ मुहूर्त
- अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:44 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक।
- अमृत काल: दोपहर 02:35 बजे से शाम 04:16 बजे तक।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अभिजीत मुहूर्त को कई शुभ कार्यों के लिए अनुकूल माना जाता है। अमृत काल भी शुभ समय के रूप में जाना जाता है। हालांकि, किसी विशेष मांगलिक कार्य के लिए स्थानीय पंचांग और परंपराओं के अनुसार समय की पुष्टि करना उचित है।
आज का चौघड़िया मुहूर्त
- अमृत (सर्वोत्तम): सुबह 06:20 बजे से 07:47 बजे तक।
- काल (सामान्य): सुबह 07:47 बजे से 09:14 बजे तक।
- शुभ (उत्तम): सुबह 09:14 बजे से 10:40 बजे तक।
- रोग (सामान्य): सुबह 10:40 बजे से दोपहर 12:07 बजे तक।
आज का अशुभ काल
- राहुकाल: सुबह 07:53 बजे से 09:19 बजे तक।
- यमगंड: सुबह 10:46 बजे से दोपहर 12:13 बजे तक।
- गुलिक काल (कुलिक): दोपहर 01:40 बजे से 03:06 बजे तक।
- दुर्मुहूर्त: दोपहर 12:36 बजे से 01:22 बजे तक तथा दोपहर 02:55 बजे से 03:41 बजे तक।
- वर्ज्यम्: सुबह 05:54 बजे से 07:37 बजे तक।
पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, राहुकाल, यमगंड, गुलिक काल और दुर्मुहूर्त में महत्वपूर्ण शुभ कार्यों की शुरुआत करने से बचने की सलाह दी जाती है। वर्ज्यम् को भी कुछ पंचांग परंपराओं में महत्वपूर्ण कार्यों के लिए प्रतिकूल समय माना जाता है। श्रद्धालु इन समयों को ध्यान में रखकर अपनी धार्मिक गतिविधियों और अन्य कार्यों की योजना बना सकते हैं।
नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। मां का यह स्वरूप तपस्या, साधना, त्याग और आत्मसंयम का संदेश देता है। धार्मिक कथाओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। उनकी इसी तपस्या के कारण उन्हें ब्रह्मचारिणी कहा जाता है।
मां ब्रह्मचारिणी के एक हाथ में जपमाला और दूसरे हाथ में कमंडल सुशोभित रहता है। उनका स्वरूप मनुष्य को सिखाता है कि जीवन में सफलता पाने के लिए धैर्य, अनुशासन और दृढ़ इच्छाशक्ति आवश्यक हैं। विपरीत परिस्थितियों में भी अपने लक्ष्य से विचलित न होना ही सच्ची साधना है।
इस दिन श्रद्धालु सुबह स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण कर मां की पूजा करते हैं। माता को पुष्प, अक्षत, फल और नैवेद्य अर्पित किया जाता है। भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार व्रत रखते हैं तथा दुर्गा चालीसा, दुर्गा सप्तशती और मां के मंत्रों का जाप करते हैं।
मां ब्रह्मचारिणी की स्तुति का मंत्र है—
दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलू।
देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥
इस मंत्र के माध्यम से भक्त मां ब्रह्मचारिणी से कृपा, शक्ति और आध्यात्मिक उन्नति का आशीर्वाद मांगते हैं।
नवरात्रि का दूसरा दिन हमें यह संदेश देता है कि कठिनाइयां मनुष्य की इच्छाशक्ति को परखती हैं। धैर्य, संयम और निरंतर प्रयास से जीवन की चुनौतियों का सामना किया जा सकता है। मां ब्रह्मचारिणी की आराधना इसी आत्मबल और दृढ़ संकल्प को जागृत करने का प्रतीक है।
मां ब्रह्मचारिणी की कृपा से जीवन में सद्बुद्धि, धैर्य, सकारात्मकता और आत्मविश्वास का संचार हो—इसी कामना के साथ श्रद्धालु नवरात्रि के दूसरे दिन माता की आराधना करेंगे।
