- नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की आराधना, बिल्वाभिमंत्रण के लिए दोपहर 2 बजे से शाम 6 बजे तक
शारदीय नवरात्रि का छठा दिन मां दुर्गा के छठे स्वरूप मां कात्यायनी की पूजा-अर्चना को समर्पित है। शुक्रवार, 16 अक्टूबर को मां कात्यायनी की आराधना के साथ भक्त सुख, समृद्धि, साहस और मनोकामना पूर्ति की कामना करेंगे। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कात्यायनी अपने भक्तों के कष्टों को दूर कर उन्हें शक्ति और आत्मविश्वास प्रदान करती हैं। नवरात्रि के इस पावन अवसर पर मंदिरों और घरों में माता की पूजा-अर्चना के साथ धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जाएगा। आज बिल्वाभिमंत्रण का समय अपराह्न 2 बजे से शाम 6 बजे तक।
पंचांग के अनुसार, आज आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि रहेगी, जो अगले दिन सुबह 5 बजकर 54 मिनट तक है। इसके बाद सप्तमी तिथि प्रारंभ होगी। ज्येष्ठा नक्षत्र सुबह 6 बजकर 47 मिनट तक रहेगा, जिसके बाद मूल नक्षत्र लगेगा। शोभन योग रात 10 बजकर 6 मिनट तक रहेगा, इसके बाद अतिगण्ड योग प्रारंभ होगा। चंद्रमा सुबह 6 बजकर 47 मिनट तक वृश्चिक राशि में रहेंगे, फिर धनु राशि में प्रवेश करेंगे। सूर्य कन्या राशि में स्थित रहेंगे। करण में शाम 4 बजकर 38 मिनट तक कौलव रहेगा, इसके बाद तैतिल करण लगेगा।
सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रमा का समय
आज सूर्योदय सुबह 6 बजकर 18 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 5 बजकर 58 मिनट पर होगा। चंद्रोदय सुबह 4 बजकर 49 मिनट पर तथा चंद्रास्त शाम 5 बजकर 3 मिनट पर होगा। दिन की शुरुआत मां कात्यायनी के स्मरण और पूजा-अर्चना से करना श्रद्धालुओं के लिए विशेष धार्मिक महत्व रखता है।
आज के प्रमुख शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:42 से 5:32 बजे तक।
- अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:43 से दोपहर 12:29 बजे तक।
- गोधूलि मुहूर्त: शाम 5:39 से 6:03 बजे तक।
- सरस्वती आह्वान मुहूर्त: दोपहर 3:33 से शाम 5:51 बजे तक।
- बिल्वाभिमंत्रण: अपराह्न 2 बजे से शाम 6 बजे तक।
आज के शुभ चौघड़िया मुहूर्त
- चर (सामान्य): सुबह 6:22 से 7:48 बजे तक।
- लाभ (उन्नति): सुबह 7:48 से 9:14 बजे तक।
- अमृत (सर्वोत्तम): सुबह 9:14 से 10:40 बजे तक।
- शुभ (उत्तम): दोपहर 12:06 से 1:34 बजे तक।
आज के अशुभ मुहूर्त
- राहुकाल: सुबह 10:40 से दोपहर 12:06 बजे तक।
- यमगण्ड: दोपहर 2:58 से शाम 4:24 बजे तक।
- गुलिक काल: सुबह 7:48 से 9:14 बजे तक।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, राहुकाल, यमगण्ड और गुलिक काल में शुभ कार्यों की शुरुआत करने से बचने की परंपरा है। हालांकि, पूजा-पाठ और नियमित धार्मिक अनुष्ठानों के संबंध में स्थानीय परंपराओं तथा विद्वानों की सलाह का पालन किया जा सकता है।
नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा का विशेष महत्व है। मान्यता है कि माता की सच्चे मन से आराधना करने से भय और बाधाओं से मुक्ति पाने की प्रेरणा मिलती है। श्रद्धालु लाल पुष्प, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित कर माता से परिवार की सुख-शांति तथा मंगल की प्रार्थना करते हैं। नवरात्रि का यह पावन पर्व भक्ति, शक्ति, संयम और सकारात्मकता का संदेश देता है।
