खबर मार्निंग , विशेष पंचांग
सनातन धर्म में पंचांग का विशेष महत्व है। हिंदू धर्मावलंबी किसी भी शुभ कार्य, पूजा-पाठ, धार्मिक अनुष्ठान और मांगलिक आयोजन से पहले तिथि, नक्षत्र, योग एवं शुभ-अशुभ मुहूर्त का विचार करते हैं। शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026 को कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि है। आज दिनभर शिव योग का प्रभाव रहेगा, जबकि रात्रि में सिद्ध योग का आरंभ होगा। ज्योतिषीय गणना के अनुसार आज चंद्रमा मिथुन राशि में संचार करेंगे और सूर्य तुला राशि में विराजमान रहेंगे।
आज की तिथि एवं नक्षत्र
पंचांग के अनुसार आज कार्तिक मास, कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि शाम 7 बजकर 25 मिनट तक रहेगी। इसके बाद षष्ठी तिथि का आरंभ हो जाएगा। मृगशीर्षा नक्षत्र सुबह 9 बजकर 04 मिनट तक रहेगा, इसके बाद आद्रा नक्षत्र प्रारंभ होगा, जो अगले दिन 31 अक्टूबर को सुबह 7 बजकर 12 मिनट तक रहेगा।
आज का योग एवं करण : आज शिव योग रात्रि 12 बजकर 05 मिनट से रात 8 बजकर 41 मिनट तक रहेगा। इसके बाद सिद्ध योग प्रारंभ होगा, जो अगले दिन शाम 5 बजकर 31 मिनट तक प्रभावी रहेगा।
करण की बात करें तो कौलव करण सुबह 8 बजकर 46 मिनट तक रहेगा। इसके बाद तैतिल करण शाम 7 बजकर 25 मिनट तक रहेगा। तत्पश्चात गर करण प्रारंभ होकर अगले दिन सुबह 6 बजकर 09 मिनट तक रहेगा। इसके बाद वणिज करण का आरंभ होगा।
सूर्योदय, सूर्यास्त एवं चंद्रोदय : आज सूर्योदय सुबह 6 बजकर 34 मिनट पर होगा, जबकि सूर्यास्त शाम 5 बजकर 46 मिनट पर होगा। चंद्रोदय रात्रि 9 बजकर 39 मिनट पर होगा। चंद्रास्त अगले दिन 31 अक्टूबर को सुबह 11 बजकर 50 मिनट पर होगा।
शुभ मुहूर्त : आज अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 48 मिनट से दोपहर 12 बजकर 32 मिनट तक रहेगा। अमृत काल रात्रि 9 बजकर 57 मिनट से 11 बजकर 25 मिनट तक रहेगा। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 59 मिनट से 5 बजकर 47 मिनट तक रहेगा।
अशुभ काल का समय : आज राहुकाल सुबह 10 बजकर 46 मिनट से दोपहर 12 बजकर 10 मिनट तक रहेगा। यमगण्ड दोपहर 2 बजकर 58 मिनट से शाम 4 बजकर 22 मिनट तक रहेगा। कुलिक काल सुबह 7 बजकर 58 मिनट से 9 बजकर 22 मिनट तक रहेगा।
दुर्मुहूर्त सुबह 8 बजकर 49 मिनट से 9 बजकर 33 मिनट तक तथा दोपहर 12 बजकर 32 मिनट से 1 बजकर 17 मिनट तक रहेगा। वहीं वर्ज्य काल शाम 4 बजकर 48 मिनट से 6 बजकर 16 मिनट तक रहेगा।
ग्रहों की स्थिति : ज्योतिषीय गणना के अनुसार सूर्य तुला राशि में विराजमान हैं, जबकि चंद्रमा मिथुन राशि में संचार करेंगे।
इस प्रकार शुक्रवार का दिन धार्मिक कार्यों, पूजा-पाठ और आध्यात्मिक चिंतन के लिए महत्वपूर्ण है। किसी भी मांगलिक अथवा विशेष कार्य को करने से पहले स्थानीय पंचांग के अनुसार शुभ-अशुभ समय का विचार अवश्य करना चाहिए।
