मौसम मेहरबान, बादलों ने छिपाया चांद; दीये की रोशनी में पति का दीदार कर सुहागिनों ने खोला व्रत

 -चांद के दीदार के लिए आसमान पर टिकी रहीं निगाहें, आस्था और विश्वास के सहारे पूरी हुई करवा चौथ की पूजा

ख़बर मॉर्निंग, विशेष संवाददाता

करवा चौथ का त्योहार, सुहाग की सलामती की कामना और चांद के दीदार का इंतजार… लेकिन इस बार मौसम ने सुहागिनों की परीक्षा लेने में कोई कसर नहीं छोड़ी। आसमान में छाए बादलों और बीच-बीच में हुई बारिश ने चांद को अपनी आगोश में छिपाए रखा। शाम ढलते ही व्रती महिलाओं की निगाहें आसमान पर टिक गईं। हर किसी को उस पल का इंतजार था, जब चांद बादलों की ओट से बाहर निकलेगा और वे अपने चांद यानी पति का चेहरा देखकर व्रत का पारण करेंगी।

मौसम की बेरुखी के बीच आस्था का रंग फीका नहीं पड़ा। आसमान में चांद नजर नहीं आने के कारण कई व्रती महिलाओं को काफी देर तक इंतजार करना पड़ा। बादलों के बीच चांद की एक झलक पाने की उम्मीद में महिलाएं कभी छत पर पहुंचतीं तो कभी खुले आसमान की ओर निहारतीं। लेकिन जब बादलों ने चांद को अपनी ओट से बाहर आने का मौका नहीं दिया, तब कई महिलाओं ने अपनी धार्मिक मान्यताओं, परंपराओं और परिस्थितियों के अनुरूप चांद के उदय का अनुमान लगाकर पूजा-अर्चना की।

इसके बाद घरों में दीये की रोशनी के बीच एक भावुक और खूबसूरत दृश्य देखने को मिला। जिन महिलाओं को आसमान में चांद का स्पष्ट दीदार नहीं हो पाया, उनमें से कई ने पति के चेहरे को ही चांद मानकर उनकी आरती उतारी और उनके दर्शन के बाद व्रत खोला। पति की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और दांपत्य जीवन में प्रेम बनाए रखने की कामना के साथ महिलाओं ने अपने जीवनसाथी के हाथों जल ग्रहण कर व्रत का समापन किया। इस दौरान कहीं पूजा की थाली सजी तो कहीं दीये की लौ के बीच पति-पत्नी के रिश्ते की आत्मीयता और गहराई नजर आई।

करवा चौथ केवल एक व्रत नहीं, बल्कि प्रेम, समर्पण, विश्वास और पारिवारिक भावनाओं से जुड़ा पर्व है। इस दिन महिलाएं निर्जला व्रत रखकर पति की दीर्घायु और सुखी दांपत्य जीवन की कामना करती हैं। सामान्य तौर पर चंद्र दर्शन, अर्घ्य और पूजा के बाद व्रत खोलने की परंपरा है। हालांकि, मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों में अलग-अलग परिवारों में प्रचलित मान्यताओं के अनुसार पूजा की जाती है।

इस बार बादलों और बारिश ने चांद की चमक को भले ही ढक दिया, लेकिन सुहागिनों के विश्वास और प्रेम की रोशनी को नहीं बुझा सके। आसमान में चांद दिखाई दे या नहीं, उनके लिए जीवनसाथी का चेहरा ही सबसे खास रहा। यही करवा चौथ की वह भावना है, जो बदलते मौसम के बीच भी रिश्तों की गर्माहट और विश्वास को कायम रखती है।

Post a Comment

Previous Post Next Post