भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि के साथ शनिवार, 12 सितंबर 2026 को शुक्ल पक्ष का शुभारंभ हो रहा है। धार्मिक दृष्टि से शुक्ल पक्ष को साधना, पूजा-पाठ, शुभ संकल्प और मांगलिक कार्यों के लिए विशेष महत्व वाला माना जाता है। इस दिन प्रतिपदा तिथि सुबह 7 बजकर 46 मिनट तक रहेगी, इसके बाद द्वितीया तिथि का आरंभ होगा। चंद्रमा पूरे दिन और रात कन्या राशि में संचार करेगा। नक्षत्र, योग और करण के परिवर्तन के साथ दिन के मुहूर्तों में भी बदलाव रहेगा।
आज की तिथि और नक्षत्र
भाद्रपद शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि सुबह 7:46 बजे तक रहेगी। इसके बाद द्वितीया तिथि प्रारंभ हो जाएगी।
आज उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र दोपहर 12:55 बजे तक रहेगा। इसके बाद हस्त नक्षत्र का आरंभ होगा।
दिन के पहले भाग में शुभ योग दोपहर 3:09 बजे तक रहेगा। इसके बाद शुक्ल योग प्रारंभ होगा।
इसी प्रकार बव करण सुबह 7:46 बजे तक रहेगा और उसके बाद बालव करण शुरू होगा।
कन्या राशि में रहेंगे चंद्रमा
आज चंद्रमा का संचार पूरे दिन और रात कन्या राशि में रहेगा। ज्योतिषीय दृष्टि से कन्या राशि को व्यावहारिकता, व्यवस्था, विवेक और सूक्ष्म विश्लेषण से संबंधित माना जाता है। ऐसे में दिन को योजनाबद्ध ढंग से कार्य करने और महत्वपूर्ण विषयों पर विचार करने के लिए अनुकूल माना जा सकता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त
सूर्योदय: सुबह 6:04 बजे
सूर्यास्त: शाम 6:30 बजे
चंद्रोदय: सुबह 7:07 बजे
चंद्रास्त: शाम 7:00 बजे
आज का शुभ मुहूर्त
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:52 बजे से 12:42 बजे तक रहेगा।
अमृत काल: आज उपलब्ध नहीं है।
अभिजीत मुहूर्त को सामान्यतः शुभ कार्यों के लिए महत्वपूर्ण समय माना जाता है। हालांकि किसी विशेष मांगलिक कार्य के लिए स्थानीय पंचांग और कार्य की प्रकृति के अनुसार मुहूर्त का विचार करना उचित रहता है।
आज का चौघड़िया
शनिवार के दिन दिए गए चौघड़िया क्रम के अनुसार—
काल: सुबह 6:04 बजे से 7:38 बजे तक — सामान्य
शुभ: सुबह 7:38 बजे से 9:11 बजे तक — उत्तम
रोग: सुबह 9:11 बजे से 10:44 बजे तक — सामान्य
उद्वेग: सुबह 10:44 बजे से दोपहर 12:17 बजे तक — अशुभ
दिन के शेष चौघड़िया मुहूर्तों का निर्धारण स्थानीय सूर्योदय के अनुसार किया जाता है।
आज के अशुभ मुहूर्त
राहुकाल: सुबह 9:00 बजे से 10:30 बजे तक रहेगा।
गुलिक काल: सुबह 6:00 बजे से 7:30 बजे तक रहेगा।
यमगंड: दोपहर 1:30 बजे से 3:30 बजे तक रहेगा।
राहुकाल, गुलिक काल और यमगंड को परंपरागत ज्योतिष में नए और महत्वपूर्ण शुभ कार्यों के लिए सामान्यतः टालने योग्य समय माना जाता है। आवश्यक कार्यों में स्थानीय परंपरा और व्यक्तिगत परिस्थिति के अनुसार निर्णय लिया जा सकता है।
धार्मिक दृष्टि से आज
भाद्रपद शुक्ल प्रतिपदा से शुक्ल पक्ष की शुरुआत होती है। इस दिन श्रद्धालु प्रातः स्नान के बाद भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी, भगवान शिव अथवा अपने इष्टदेव की पूजा कर सकते हैं। घर में दीप प्रज्वलित कर भगवान का स्मरण, मंत्र-जप और दान-पुण्य करने की परंपरा भी है।
शुक्ल पक्ष की शुरुआत को नई ऊर्जा और सकारात्मक संकल्प के साथ जोड़कर देखा जाता है। इसलिए आज के दिन नकारात्मक विचारों का त्याग कर अच्छे कार्यों का संकल्प लेना आध्यात्मिक दृष्टि से शुभ माना जाता है।
नोट: पंचांग के समय स्थान के अनुसार कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकते हैं। यहां दिए गए समय आपके उपलब्ध पंचांग विवरण के आधार पर हैं। किसी विशेष पूजा, व्रत या मांगलिक कार्य के लिए स्थानीय सूर्योदय और पंचांग के अनुसार समय का मिलान करना उचित रहेगा।

