-हरियाली तीज विशेष: शिव-पार्वती के अटूट प्रेम और अखंड सौभाग्य का पर्व, जानिए व्रत की विशेषता, महत्व, पूजा विधि और पौराणिक कथा
विनोद कुमार झा
सावन मास की हरियाली, झूले, मेहंदी, चूड़ियों की खनक और शिव-पार्वती की भक्ति इन सबका सुंदर संगम है हरियाली तीज। हिंदू धर्म में सावन शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाया जाने वाला यह पर्व विशेष रूप से सुहागिन महिलाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। महिलाएं इस दिन पति की दीर्घायु, अखंड सौभाग्य और सुखी दांपत्य जीवन की कामना से व्रत रखती हैं। वहीं अविवाहित कन्याएं भी मनचाहे एवं योग्य वर की प्राप्ति की कामना से इस व्रत को करती हैं।
15 अगस्त को ही रखा जाएगा हरियाली तीज का व्रत : पंचांग के अनुसार इस वर्ष सावन शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 14 अगस्त 2026 की शाम 6 बजकर 46 मिनट से शुरू होकर 15 अगस्त की शाम 5 बजकर 28 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार हरियाली तीज का व्रत 15 अगस्त 2026, शनिवार को रखा जाएगा। इस बार हरियाली तीज के दिन ही स्वतंत्रता दिवस भी है, इसलिए 15 अगस्त का दिन धार्मिक और राष्ट्रीय दोनों दृष्टि से विशेष रहेगा।
क्यों मनाई जाती है हरियाली तीज?
हरियाली तीज का संबंध भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य मिलन से माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। उन्होंने अनेक वर्षों तक तप किया और कठिन परिस्थितियों में भी अपनी साधना जारी रखी।
माता पार्वती की इसी कठोर तपस्या और अटूट संकल्प से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया। इसी पौराणिक प्रसंग की स्मृति में सावन शुक्ल पक्ष की तृतीया को हरियाली तीज मनाने की परंपरा मानी जाती है। इसलिए हरियाली तीज केवल पति की लंबी आयु का व्रत नहीं, बल्कि प्रेम, समर्पण, विश्वास, तपस्या और दांपत्य की पवित्रता का पर्व भी है।
हरियाली तीज की पौराणिक कथा : पौराणिक कथा के अनुसार माता पार्वती भगवान शिव को अपने पति के रूप में प्राप्त करना चाहती थीं। इसके लिए उन्होंने कठोर तपस्या की। माता पार्वती की तपस्या इतनी कठिन थी कि उन्होंने अन्न-जल तक का त्याग कर दिया और लंबे समय तक भगवान शिव की आराधना में लीन रहीं।
माता पार्वती के तप और संकल्प को देखकर भगवान शिव प्रसन्न हुए। उन्होंने माता पार्वती की इच्छा स्वीकार की और उन्हें अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया।
मान्यता है कि माता पार्वती को भगवान शिव की प्राप्ति सावन मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया के दिन हुई थी। इसी कारण इस दिन महिलाएं माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा करती हैं और अपने वैवाहिक जीवन में प्रेम, सुख, शांति एवं स्थायित्व की प्रार्थना करती हैं। कथा का संदेश यह है कि सच्ची श्रद्धा, धैर्य, तपस्या और समर्पण से मनुष्य अपने जीवन के बड़े लक्ष्य को प्राप्त कर सकता है।
हरियाली तीज का धार्मिक महत्व
हरियाली तीज को सुहाग और सौभाग्य का प्रमुख पर्व माना जाता है। सुहागिन महिलाएं इस दिन निर्जला या अपनी क्षमता के अनुसार व्रत रखकर शिव-पार्वती की पूजा करती हैं।
मान्यता के अनुसार इस व्रत से-
- पति की दीर्घायु और अच्छे स्वास्थ्य की कामना की जाती है।
- अखंड सौभाग्य की प्राप्ति का आशीर्वाद मिलता है।
- दांपत्य जीवन में प्रेम और आपसी विश्वास बढ़ता है।
- परिवार में सुख-शांति और समृद्धि की कामना की जाती है।
- अविवाहित कन्याएं योग्य एवं मनचाहे वर की कामना करती हैं। हालांकि व्रत का फल श्रद्धा और धार्मिक मान्यता का विषय है; इसे आस्था के रूप में ही देखना चाहिए।
हरियाली तीज में हरे रंग का विशेष महत्व
सावन आते ही प्रकृति चारों ओर हरियाली से भर जाती है। पेड़-पौधों पर नई पत्तियां आती हैं और वातावरण सुहावना हो जाता है। इसी प्राकृतिक सौंदर्य के कारण इस तीज को हरियाली तीज कहा जाता है।
हरे रंग को प्रकृति, नवजीवन, उर्वरता और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है। इसलिए महिलाएं इस दिन हरे रंग की साड़ी, चूड़ियां और अन्य श्रृंगार सामग्री धारण करती हैं। मेहंदी लगाने, झूला झूलने और सावन के लोकगीत गाने की परंपरा भी इस पर्व को विशेष बनाती है।
हरियाली तीज पर सिंधारा की परंपरा
हरियाली तीज से जुड़ी एक सुंदर परंपरा सिंधारा भी है। कई क्षेत्रों में माता-पिता अपनी विवाहित बेटी के लिए मायके से सिंधारा भेजते हैं।
सिंधारे में कपड़े, श्रृंगार सामग्री, मेहंदी, चूड़ियां, मिठाई, फल और अन्य उपहार भेजे जाते हैं। यह केवल उपहार देने की परंपरा नहीं, बल्कि बेटी के प्रति मायके के स्नेह और आशीर्वाद का प्रतीक माना जाता है।
हरियाली तीज की पूजा विधि : हरियाली तीज के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। संभव हो तो हरे रंग के वस्त्र पहनें। इसके बाद पूजा स्थल को साफ करके भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
पूजा की सामान्य विधि इस प्रकार है:-
1. सबसे पहले भगवान गणेश का स्मरण करें।
2. शिव-पार्वती की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
3. भगवान शिव को जल, गंगाजल, बेलपत्र, फूल, अक्षत, चंदन और फल अर्पित करें।
4. माता पार्वती को श्रृंगार सामग्री, मेहंदी, चूड़ियां, सिंदूर, बिंदी, वस्त्र और पुष्प अर्पित करें।
5. भगवान शिव और माता पार्वती को फल एवं मिठाई का भोग लगाएं।
6. श्रद्धापूर्वक हरियाली तीज की व्रत कथा पढ़ें या सुनें।
7. शिव-पार्वती की आरती करें।
8. परिवार के सुख-शांति, पति की दीर्घायु और अखंड सौभाग्य की कामना करें।
पूजा में मिट्टी से शिव-पार्वती की प्रतिमा बनाकर पूजन करने की परंपरा भी कई स्थानों पर प्रचलित है।
पूजा सामग्री में क्या रखें?
हरियाली तीज की पूजा के लिए अपनी परंपरा के अनुसार सामग्री रखी जा सकती है। सामान्यतः इसमें:- भगवान शिव के लिए: जल, गंगाजल, बेलपत्र, धतूरा, सफेद पुष्प, चंदन, अक्षत, फल और मिठाई।
माता पार्वती के लिए: लाल या हरे वस्त्र, चुनरी, सिंदूर, बिंदी, मेहंदी, चूड़ियां, काजल, कंघी, दर्पण और अन्य श्रृंगार सामग्री।इसके अलावा धूप, दीप, रोली, मौली, नैवेद्य और पंचामृत आदि भी पूजा में रखे जा सकते हैं।
सोलह श्रृंगार का महत्व
हरियाली तीज पर सुहागिन महिलाओं के लिए सोलह श्रृंगार की भी विशेष परंपरा है। सिंदूर, बिंदी, मेहंदी, चूड़ियां, मंगलसूत्र, नथ, पायल आदि श्रृंगार सामग्री को सुहाग और दांपत्य जीवन की मंगलकामना से जोड़ा जाता है। इस दिन महिलाएं सुंदर वस्त्र पहनकर सजती-संवरती हैं, हाथों में मेहंदी लगाती हैं और शिव-पार्वती की पूजा करती हैं।
व्रत में रखें अपनी क्षमता का रखें ध्यान
हरियाली तीज पर कई महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं। हालांकि निर्जला व्रत हर व्यक्ति के लिए आवश्यक नहीं है। यदि किसी को स्वास्थ्य संबंधी समस्या हो, गर्भावस्था हो, उम्र अधिक हो या चिकित्सकीय कारणों से उपवास कठिन हो, तो अपनी क्षमता और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार ही व्रत रखना उचित है।व्रत का मूल भाव श्रद्धा, संयम और भक्ति है, केवल कठिन उपवास करना नहीं।
झूले और सावन के गीतों से सजता है पर्व
हरियाली तीज का सामाजिक और सांस्कृतिक पक्ष भी बेहद सुंदर है। गांवों और कस्बों में पेड़ों पर झूले लगाए जाते हैं। महिलाएं और युवतियां झूला झूलते हुए सावन के पारंपरिक गीत गाती हैं।
मेहंदी, चूड़ियां, हरे वस्त्र और पकवान इस पर्व की रौनक बढ़ाते हैं। कई जगह महिलाएं सामूहिक रूप से शिव-पार्वती की पूजा करती हैं और तीज के गीत गाती हैं।
इस तरह हरियाली तीज धार्मिक आस्था के साथ-साथ भारतीय लोक संस्कृति, पारिवारिक प्रेम और नारी उत्सव का भी प्रतीक बन जाती है।
हरियाली तीज हमें क्या संदेश देती है?
हरियाली तीज की कथा केवल एक धार्मिक प्रसंग नहीं है। माता पार्वती की तपस्या हमें धैर्य और दृढ़ संकल्प का संदेश देती है। भगवान शिव और माता पार्वती का संबंध प्रेम, विश्वास, सम्मान और साझेदारी का प्रतीक माना जाता है।
आज के समय में भी इस पर्व का संदेश यही है कि परिवार और दांपत्य जीवन की मजबूती केवल परंपराओं से नहीं, बल्कि आपसी सम्मान, विश्वास, संवाद और प्रेम से होती है। हरियाली तीज प्रकृति के प्रति प्रेम का संदेश भी देती है। सावन की हरियाली हमें पेड़-पौधों और पर्यावरण के संरक्षण की प्रेरणा देती है।
हरियाली तीज 2026: एक नजर में
पर्व: हरियाली तीज
तिथि: 15 अगस्त 2026, शनिवार
पक्ष: श्रावण शुक्ल पक्ष
तिथि: शुक्ल तृतीया
तृतीया प्रारंभ: 14 अगस्त शाम 6:46 बजे
तृतीया समाप्त: 15 अगस्त शाम 5:28 बजे
आराध्य: भगवान शिव और माता पार्वती
मुख्य कामना: अखंड सौभाग्य, सुखी दांपत्य जीवन और परिवार की खुशहाली
तिथि संबंधी समय स्थानीय पंचांग के अनुसार थोड़ा अलग हो सकता है, इसलिए पूजा के लिए अपने क्षेत्र के पंचांग को प्राथमिकता देना उचित रहेगा।
अंत में हरियाली तीज केवल एक दिन का व्रत नहीं, बल्कि शिव-पार्वती के पवित्र प्रेम, नारी शक्ति, वैवाहिक विश्वास और सावन की हरियाली का उत्सव है। इस दिन महिलाएं पूरे श्रद्धाभाव से माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा कर अपने परिवार के सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। माता पार्वती और भगवान शिव सभी के जीवन में प्रेम, शांति, सौभाग्य और खुशहाली प्रदान करें।
हर हर महादेव। जय माता पार्वती।
हरियाली तीज की हार्दिक शुभकामनाएं।
