भारतीय सनातन परंपरा में पंचांग केवल तिथि और समय का विवरण नहीं, बल्कि जीवन के शुभ-अशुभ क्षणों का मार्गदर्शक माना जाता है। ग्रह-नक्षत्रों की चाल, योग और करण के आधार पर दिनचर्या, यात्रा, पूजा और महत्वपूर्ण कार्यों की योजना बनाई जाती है। आज का दिन विशेष रूप से धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, क्योंकि अष्टमी तिथि के साथ पुष्य नक्षत्र का संयोग कई शुभ कार्यों के लिए अनुकूल संकेत दे रहा है।
आज की तिथि एवं नक्षत्र
पंचांग के अनुसार आज वैशाख शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि सायं 07 बजकर 21 मिनट तक रहेगी, इसके पश्चात नवमी तिथि का आरंभ होगा।
पुष्य नक्षत्र रात्रि 08 बजकर 14 मिनट तक रहेगा, उसके बाद अश्लेषा नक्षत्र प्रारंभ होगा।
योग: शूल योग रात्रि 01 बजकर 24 मिनट (25 अप्रैल) तक रहेगा, इसके बाद गण्ड योग आरंभ होगा।
करण: विष्टि करण प्रातः 08 बजकर 01 मिनट तक रहेगा, इसके बाद बव करण का आरंभ होगा।
चंद्र स्थिति: चंद्रमा दिन-रात कर्क राशि में संचार करेगा, जो भावनात्मक संतुलन और पारिवारिक मामलों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
सूर्य एवं चंद्रमा का समय
- सूर्योदय: सुबह 05:47 बजे
- सूर्यास्त: शाम 06:52 बजे
- चंद्र उदय: दोपहर 12:05 बजे
- चंद्रास्त: अगले दिन (25 अप्रैल) रात्रि 01:56 बजे
आज का चौघड़िया (शुभ-अशुभ समय)
- चर (सामान्य): प्रातः 05:17 बजे से 06:54 बजे तक
- लाभ (उन्नति): प्रातः 06:54 बजे से 08:31 बजे तक
- अमृत (सर्वोत्तम): प्रातः 08:31 बजे से 10:07 बजे तक
- काल (हानि): प्रातः 10:07 बजे से 11:43 बजे तक
- शुभ (उत्तम): दोपहर 11:43 बजे से 01:20 बजे तक
- रोग (अशुभ): दोपहर 01:20 बजे से 02:56 बजे तक
- उद्वेग (अशुभ): दोपहर 02:56 बजे से 04:33 बजे तक
- चर (सामान्य): सायं 04:33 बजे से 06:11 बजे तक
आज के शुभ मुहूर्त
- अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:37 बजे से 12:26 बजे तक
- ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 03:48 बजे से 04:32 बजे तक
आज के अशुभ काल
- राहुकाल: प्रातः 10:07 बजे से 11:43 बजे तक
- यमगण्ड: दोपहर 02:56 बजे से 04:33 बजे तक
- गुलिक काल: प्रातः 07:30 बजे से 09:00 बजे तक
- दिशाशूल: पश्चिम दिशा
(आवश्यक यात्रा से पूर्व जौ या राई का सेवन करना शुभ माना गया है)
भद्रा काल
- भद्रा आरंभ: 23 अप्रैल 2026, रात्रि 08:49 बजे
- भद्रा समाप्ति: 24 अप्रैल 2026, प्रातः 08:01 बजे
भद्रा काल में शुभ और मांगलिक कार्यों से परहेज करना चाहिए, हालांकि दैनिक कार्य सामान्य रूप से किए जा सकते हैं।
धार्मिक महत्व
आज का दिन अष्टमी तिथि और पुष्य नक्षत्र के कारण विशेष फलदायी माना जा रहा है। यह संयोग पूजा-पाठ, दान-पुण्य और नए कार्यों की शुरुआत के लिए अनुकूल है। विशेष रूप से अभिजीत मुहूर्त में किए गए कार्यों के सफल होने की संभावना अधिक रहती है।
आज का दिन मिश्रित फल देने वाला है। सुबह का समय अत्यंत शुभ है, वहीं कुछ अशुभ कालों में सावधानी बरतना आवश्यक है। धर्म, साधना और सकारात्मक कार्यों के लिए यह दिन अनुकूल अवसर प्रदान कर रहा है।
