भारतीय संस्कृति में पंचांग का विशेष महत्व है। यह न केवल तिथि, वार और नक्षत्र की जानकारी देता है, बल्कि दैनिक जीवन के निर्णयों, शुभ कार्यों और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए मार्गदर्शन भी प्रदान करता है। 21 मार्च 2026 का दिन चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि के साथ शनिवार को पड़ रहा है। वसंत ऋतु और उत्तरायण का यह काल आध्यात्मिक साधना, नव आरंभ और सकारात्मक ऊर्जा के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
इस दिन ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति और शुभ-अशुभ मुहूर्तों का ध्यान रखते हुए कार्य करने से सफलता और शांति की प्राप्ति होती है।
पंचांग विवरण – 21 मार्च 2026
- दिन : शनिवार
- विक्रम संवत् : 2083
- अयन : उत्तरायण
- ऋतु : वसंत
- मास : चैत्र
- पक्ष : शुक्ल पक्ष
तिथि एवं नक्षत्र
- तिथि : शुक्ल तृतीया — रात्रि 11:56 बजे तक
- नक्षत्र : अश्विनी — रात्रि 12:37 बजे तक
तृतीया तिथि को विशेष रूप से शुभ कार्यों, नए कार्यारंभ और पूजन के लिए अनुकूल माना जाता है। अश्विनी नक्षत्र तेज गति, ऊर्जा और आरंभ का प्रतीक है, जो नए संकल्पों के लिए प्रेरित करता है।
योग एवं करण
- योग : ऐंद्र — शाम 07:01 बजे तक
- करण :
- तैतिल — दोपहर 01:14 बजे तक
- तत्पश्चात गर
ऐंद्र योग को शुभता और समृद्धि प्रदान करने वाला माना जाता है, जबकि तैतिल और गर करण सामान्यतः स्थिरता और कार्य सिद्धि के लिए अनुकूल होते हैं।
सूर्योदय एवं सूर्यास्त
- सूर्योदय : प्रातः 06:12 बजे
- सूर्यास्त : संध्या 06:20 बजे
अशुभ काल
- राहुकाल : सुबह 09:14 बजे से 10:45 बजे तक
- दिशा शूल : पूर्व दिशा में
राहुकाल के दौरान नए या महत्वपूर्ण कार्यों की शुरुआत से बचना चाहिए। साथ ही पूर्व दिशा की यात्रा टालना शुभ माना जाता है।
शुभ मुहूर्त
- ब्रह्ममुहूर्त : प्रातः 04:40 बजे से 05:28 बजे तक
- अभिजीत मुहूर्त : सुबह 11:52 बजे से दोपहर 12:40 बजे तक
- निशिता मुहूर्त : रात्रि 11:56 बजे से 12:48 बजे तक
ब्रह्ममुहूर्त साधना, ध्यान और पूजा के लिए अत्यंत श्रेष्ठ समय होता है, जबकि अभिजीत मुहूर्त में किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत की जा सकती है।
ग्रह स्थिति
- सूर्य राशि : मीन
- चंद्रमा राशि : मेष
- बृहस्पति राशि : मिथुन
चंद्रमा का मेष राशि में होना उत्साह, ऊर्जा और निर्णय क्षमता को बढ़ाता है। वहीं मीन राशि में सूर्य आध्यात्मिकता और संवेदनशीलता का संकेत देता है।
चैत्र मास का शुक्ल पक्ष नवचेतना और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक होता है। इस दिन तृतीया तिथि और अश्विनी नक्षत्र का संयोग नए कार्यों की शुरुआत, पूजन और संकल्प के लिए विशेष रूप से शुभ माना जा सकता है। हालांकि राहुकाल और दिशा शूल का ध्यान रखना आवश्यक है।
21 मार्च 2026 का दिन धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण और संतुलित ऊर्जा वाला है। उचित मुहूर्त में किए गए कार्य सफलता की ओर अग्रसर करेंगे, वहीं सावधानीपूर्वक समय का चयन जीवन में शुभता और समृद्धि लाने में सहायक सिद्ध होगा।
