चैत्र नवरात्रि आज से प्रारंभ: कलश स्थापना मुहूर्त: प्रातः 06:20 से 10:15 बजे तक व 12:10 से 12:55 बजे तक

विनोद कुमार झा 

आज से पूरे देश में चैत्र नवरात्रि का शुभारंभ हो रहा है। यह पर्व केवल देवी दुर्गा की आराधना तक सीमित नहीं है, बल्कि आत्मसंयम, साधना और सकारात्मक ऊर्जा के जागरण का भी प्रतीक है। नौ दिनों तक चलने वाला यह पावन उत्सव भारतीय संस्कृति में आध्यात्मिक उन्नति और शक्ति के साधन के रूप में विशेष महत्व रखता है। भक्तजन आज से व्रत का संकल्प लेकर मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधिपूर्वक पूजा-अर्चना करेंगे।

कलश (घट) स्थापना के शुभ मुहूर्त :  हिंदू पंचांग के अनुसार, चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि पर कलश स्थापना का विशेष महत्व होता है। आज कलश स्थापना के प्रमुख शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं:-

  • प्रातःकाल मुहूर्त: सुबह लगभग 06:20 बजे से 10:15 बजे तक
  • अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:10 बजे से 12:55 बजे तक (विशेष रूप से शुभ)।  इन मुहूर्तों में श्रद्धापूर्वक कलश स्थापना करने से घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।                    

कैसे करें व्रत और माता की पूजा : नवरात्रि के व्रत और पूजा का विधान अत्यंत सरल होते हुए भी अनुशासन की मांग करता है। सबसे पहले प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा स्थान को शुद्ध करें। इसके बाद मिट्टी के पात्र में जौ बोकर उसके ऊपर जल से भरा कलश स्थापित करें। कलश पर नारियल और आम के पत्ते रखे जाते हैं, जो समृद्धि और जीवन के प्रतीक हैं। 

माता दुर्गा की प्रतिमा या चित्र के सामने दीप प्रज्वलित करें और दुर्गा सप्तशती, दुर्गा चालीसा या मंत्रों का पाठ करें। पूरे नौ दिनों तक नियमित रूप से पूजा करने का विशेष महत्व है। श्रद्धालु फलाहार या निर्जल व्रत रखकर अपनी श्रद्धा अनुसार नियमों का पालन करते हैं।

व्रत के दौरान क्या करें और क्या न करें : नवरात्रि केवल उपवास नहीं, बल्कि आत्मसंयम और शुद्धता का अभ्यास है। इसलिए कुछ विशेष नियमों का पालन आवश्यक माना गया है।

क्या करें:

  • सात्विक भोजन जैसे फल, दूध, साबूदाना, कुट्टू या सिंहाड़े का सेवन करें
  • प्रतिदिन माता की आरती और मंत्र जाप करें
  • मन, वचन और कर्म से पवित्रता बनाए रखें
  • जरूरतमंदों को दान और सेवा करें

क्या न करें:

  • तामसिक भोजन जैसे मांस, मदिरा, लहसुन-प्याज का सेवन न करें
  • क्रोध, झूठ और नकारात्मक विचारों से दूर रहें
  • घर में अशांति या विवाद से बचें
  • पूजा के नियमों में लापरवाही न बरतें।

चैत्र नवरात्रि हमें यह सिखाती है कि जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और शक्ति का संचार तभी संभव है, जब हम अपने भीतर की नकारात्मकताओं को समाप्त करें। यह पर्व नारी शक्ति के सम्मान और उसकी महत्ता को भी रेखांकित करता है।

आज के आधुनिक दौर में, जब भागदौड़ और तनाव से जीवन प्रभावित हो रहा है, ऐसे में नवरात्रि आत्ममंथन और मानसिक शांति प्राप्त करने का अवसर प्रदान करती है। यह समय है अपने भीतर की शक्ति को पहचानने और उसे समाज के कल्याण में लगाने का।

जय माता दी 

निष्कर्ष

चैत्र नवरात्रि केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि जीवन को संतुलित और सकारात्मक दिशा देने का पर्व है। यदि श्रद्धा, अनुशासन और समर्पण के साथ इस पर्व को मनाया जाए, तो यह न केवल आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता है, बल्कि सामाजिक समरसता और मानवता के मूल्यों को भी सुदृढ़ करता है।

मां दुर्गा से यही प्रार्थना है कि वे सभी भक्तों के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करें।

जय माता दी!

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