मूवी रिव्यू : मर्दानी 3

 रानी तीसरी बार बनी 'मर्दानी'

ज्वलंत मुद्दे को ईमानदारी से उठाती है फिल्म 'मर्दानी 3'

रेटिंग :  4 स्टार 

संजीव कुमार झा

बॉक्स ऑफिस पर पर इस फिल्म 'मर्दानी 3' से पहले आई इस सीरीज की पिछली दोनों फिल्में हिट साबित हुई और इन्हीं दोनों फिल्मों को टिकट खिड़की पर मिली जबरदस्त कामयाबी के साथ साथ क्रिटिक्स से मिली तारीफों ने बैनर और फिल्म की लीड एक्ट्रेस रानी मुखर्जी को सीरीज की तीसरी फिल्म बनाने को प्रेरित किया। पिछले दिनों दिल्ली आई रानी ने एक सवाल के जवाब में बताया था कि मुझे ऐसे प्रोजेक्ट पर काम करना कुछ ज्यादा ही पसंद रहा है, तभी तो लंबे अरसे के बाद मैंने अपनी टीम के साथ इस प्रोजेक्ट पर काम करने का फैसला किया। इन दिनों जब तीन से साढ़े तीन घंटे की फिल्में रिकॉर्ड बिजनेस कर रही हैं, ऐसे में करीब दो घंटे की इस फिल्म को हर और से तारीफें मिल रही हैं, तो इसकी एक वजह फिल्म की किसी हुई स्क्रिप्ट के साथ स्टार्ट टू लास्ट फिल्म की ऐसी कहानी है, जो आपको पर्दे के साथ बांध सा देती है। रानी को साधुवाद कि उन्होंने  ऐसे सब्जेक्ट पर फिल्म बनाई जिसे टिकट खिड़की के मापदंड पर कमजोर माना जाता है, लेकिन यह फिल्म एक इसी परफेक्ट फिल्म है जो स्टार्ट टू लास्ट आप को फिल्म के हर किरदार के साथ भी बांधती है।

मेरी नजर में रानी की इस फ्रेंचाइजी की स्टोरी दोनों फिल्मों से कुछ हद तक अलग और नयापन लिए हुए है। पिछली दोनों फिल्मों से कुछ हटकर बनी यह फिल्म छोटी बच्चियों पर हो रहे अपराध, उनकी सुरक्षा के साथ पुलिस की एक साफ बेदाग इमेज भी सामने रखती है, वरना हिंदी फिल्मों में तो पुलिस को विलेन बना कर पेश किया जाता है। डायरेक्टर अभिराज मीनावाला ने फिल्म की शुरुआत से ही फिल्म का माहौल गंभीर रखा है। ऐसे सब्जेक्ट पर बनने वाली फिल्म के लिए यह जरूरी भी था। 

स्टोरी प्लॉट 

एनआईए की टीम की अधिकारी शिवानी (रानी  मुखर्जी) को एक हाई-प्रोफाइल किडनैपिंग केस दिया जाता है। एक उच्च अधिकारी की बेटी और घर की नौकरानी की भी बेटी अचानक गायब हो जाती हैं। यह केस शिवानी के लिए जल्द से जल्द सुलझाना इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि इस समय अलग—अलग इलाकों से करीब आठ से तेरह साल की नब्बे से ज्यादा लड़कियां भी गायब हो चुकी हैं। शिवानी को केस की जांच के दौरान पता चलता है कि इसके पीछे एक संगठित मानव तस्करी गिरोह का हाथ है। एक के बाद एक इन बड़े खुलासों के बाद शिवानी अपनी जांच का दायरा बढ़ाती है और फिल्म की कहानी एक ऐसे मोड़ पर आ जाती है जिसकी किसी ने कल्पना तक नहीं की थी। इंटरवल के बाद फिल्म की रफ़्तार इस कदर तेज है कि आपका ध्यान स्क्रीन से एक पल भी अगर हटता है तो आप बहुत कुछ मिस कर जाते हैं।

एक्टिंग

पिछली दोनों फिल्मों की तरह यह फिल्म भी रानी मुखर्जी के आसपास ही घूमती है, लेकिन इस बार रानी का किरदार पिछली दोनों फिल्मों से ज्यादा व्यापक है। यही वजह है कि रानी ने फिल्म की शूटिंग शुरू होने से पहले करीब बीस दिन एक वर्कशॉप अटेंड की। रानी के फेस एक्सप्रेशन हर पल बदलता है, चाहे वह केस की जांच का तनाव हो या कुछ और खासकर, गुस्से वाले दृश्यों में रानी की स्थिति और हर दृश्य में रानी का अपने किरदार पर कंट्रोल और स्क्रीन-प्रेजेंस गजब है। रानी ने एक पुलिस ऑफिसर की थकान, उसके अंदर छिपी मानवीय भावनाओं को बेहतरीन ढंग से पेश किया है।

फिल्म में मल्लिका प्रसाद ने विलेन अम्मा के किरदार को पूरे शिद्दत से निभाया है। मल्लिका ने फिल्म में अपने हर दृश्य को बहुत प्रभावी ढंग से पेश किया है। फिल्म में उसकी मौजूदगी इस कदर जानदार है कि रानी और मल्लिका के बीच के दृश्य फिल्म को और जानदार बनाते हैं। शैतान वश आदि फिल्मों के बाद इस फिल्म में जानकी बोड़ीवाला भी अहम रोल में हैं। जानकी फिल्म में शिवानी की टीम का हिस्सा होती हैं और अपने हर सीन में पूरी तरह फिट दिखती हैं। फिल्म के अन्य कलाकारो ने भी अपने अपने किरदार को अच्छे ढंग से निभाया है। 

ओवर ऑल: 

निर्देशक अभिराज मीनावाला की फिल्म पर अच्छी पकड़ है। उन्होंने कहानी को भटकने नहीं दिया है। फिल्म की रफ्तार ठीक है, जबकि कहानी को उन्होंने ट्रैक पर रखा है।

हालांकि, इंटरवल से पहले फिल्म की रफ़्तार कुछ धीमी है, लेकिन फिल्म का क्लाइमेक्स चौंकाने वाला हैं

क्यों देखे

अगर आप रानी मुखर्जी के फैन हैं और सच्चाई से सामना कराती फिल्में पसंद करते हैं तो 'मर्दानी 3' मिस नहीं करें।

कलाकार: रानी मुखर्जी, जानकी बोड़ीवाला, मल्लिका प्रसाद आदि 

निर्माता:  आदित्य चोपड़ा

निर्देशक: अभि राज मीनावाला

सेंसर: यूए

अवधि:  126 मिनट

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