विनोद कुमार झा
केरल की राजनीति में एक नए मोड़ का संकेत देते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने तिरुअनंतपुरम नगर निगम में भाजपा की पहली जीत को ‘ऐतिहासिक’ बताया है। उन्होंने इस जीत को केवल एक स्थानीय निकाय की सफलता नहीं, बल्कि राज्य की राजनीति में लंबे समय से चले आ रहे एलडीएफ और यूडीएफ के कथित ‘फिक्स मैच’ के अंत की शुरुआत करार दिया। प्रधानमंत्री का यह बयान केरल के उस राजनीतिक परिदृश्य पर सीधा प्रहार है, जहां दशकों से सत्ता का खेल इन्हीं दो मोर्चों के बीच घूमता रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी के अनुसार, केरल की जनता विशेषकर युवा और महिलाएं अब एक नए ‘सूर्योदय’ के लिए तैयार हैं। तिरुअनंतपुरम जैसे सांस्कृतिक, बौद्धिक और ऐतिहासिक रूप से समृद्ध शहर में भाजपा की जीत को वे राष्ट्रवाद और विकास आधारित राजनीति के उभरते विकल्प के रूप में देखते हैं। उनका यह कहना कि “बहिष्कार नहीं, बल्कि विकास और सुशासन ही आगे का रास्ता है”, भाजपा की वैचारिक दिशा को स्पष्ट करता है और यह संकेत देता है कि पार्टी केरल में अपनी जड़ें मजबूत करने के प्रयास तेज करेगी। यह राजनीतिक संदेश ऐसे समय में आया है, जब प्रधानमंत्री का एक और कार्यक्रम ‘परीक्षा पे चर्चा’ देशभर में अभूतपूर्व जनभागीदारी दर्ज कर रहा है। नौवें संस्करण के लिए तीन करोड़ से अधिक पंजीकरण इस बात का प्रमाण हैं कि शिक्षा, मानसिक स्वास्थ्य और छात्रों के भविष्य से जुड़े विषयों पर संवाद की आवश्यकता और स्वीकार्यता कितनी बढ़ चुकी है। छात्र, शिक्षक और अभिभावक तीनों की सहभागिता इस पहल को केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय आंदोलन का स्वरूप देती है।
‘परीक्षा पे चर्चा’ का उद्देश्य केवल परीक्षा के तनाव पर बात करना नहीं है, बल्कि खेल, तकनीक, वित्तीय साक्षरता, रचनात्मकता और सकारात्मक सोच जैसे व्यापक जीवन कौशलों को भी केंद्र में लाना है। विभिन्न राज्यों और स्कूल प्रणालियों से छात्रों की भागीदारी, साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी पहचान, भारत की शिक्षा नीति में संवाद और नवाचार के बढ़ते महत्व को दर्शाती है। इन दोनों घटनाओं केरल में राजनीतिक बदलाव के संकेत और ‘परीक्षा पे चर्चा’ में जनसहभागिता का साझा सूत्र है बदलाव की आकांक्षा। एक ओर मतदाता पुराने राजनीतिक ढर्रों से अलग विकल्प तलाशते दिख रहे हैं, तो दूसरी ओर युवा पीढ़ी शिक्षा को केवल अंकों से आगे ले जाकर जीवन निर्माण का साधन मानने लगी है। यह समय भारत के लोकतंत्र और सामाजिक विमर्श के लिए महत्वपूर्ण है, जहां राजनीति और शिक्षा दोनों क्षेत्रों में नए विचारों और नए प्रयोगों के लिए जगह बनती दिखाई दे रही है।

