विनोद कुमार झा
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्पष्ट किया है कि वर्ष 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य तभी साकार हो सकता है, जब देश की आर्थिक नीतियों में दीर्घकालीन सोच के साथ मिशन मोड में सुधार किए जाएं। नीति आयोग में आयोजित बैठक के दौरान उन्होंने वित्त वर्ष 2026–27 के केंद्रीय बजट की तैयारियों के संदर्भ में यह संदेश दिया कि अब समय आ गया है जब नीति-निर्माण और बजट निर्धारण केवल तात्कालिक आवश्यकताओं तक सीमित न रहकर आने वाले दो दशकों की जरूरतों को ध्यान में रखे।
प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘विकसित भारत’ का संकल्प अब केवल सरकारी दस्तावेजों या घोषणाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आम जनता की आकांक्षा बन चुका है। ऐसे में आवश्यक है कि सरकार की हर नीति, हर योजना और हर बजटीय निर्णय 2047 के लक्ष्य से जुड़ा हो। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि भारत को वैश्विक श्रम शक्ति और अंतरराष्ट्रीय बाजारों के लिए एक भरोसेमंद और प्रभावी केंद्र के रूप में स्थापित किया जाए।
बैठक का विषय ‘आत्मनिर्भरता एवं संरचनात्मक रूपांतरण: विकसित भारत के लिए एजेंडा’ रखा गया, जो यह दर्शाता है कि आत्मनिर्भरता का अर्थ आत्मकेंद्रित होना नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ मजबूती से जुड़ते हुए अपनी क्षमताओं को बढ़ाना है। प्रधानमंत्री ने वैश्विक स्तर की क्षमताओं के निर्माण और अंतरराष्ट्रीय एकीकरण को दीर्घकालीन आर्थिक वृद्धि की अनिवार्य शर्त बताया।
इस संवाद में शामिल जाने-माने अर्थशास्त्रियों और विशेषज्ञों ने निर्माण और सेवा क्षेत्रों में उत्पादकता तथा प्रतिस्पर्धी क्षमता बढ़ाने के उपायों पर अपने सुझाव रखे। उनका कहना था कि घरेलू बचत को प्रोत्साहित करना, मजबूत और आधुनिक बुनियादी ढांचे का निर्माण तथा नई तकनीकों का व्यापक उपयोग भारत की आर्थिक संरचना में आवश्यक बदलाव ला सकता है। इन उपायों से न केवल निवेश बढ़ेगा, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
चर्चा के दौरान कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की भूमिका पर विशेष ध्यान दिया गया। विशेषज्ञों ने एआई को विभिन्न क्षेत्रों में उत्पादकता बढ़ाने, निर्णय प्रक्रिया को बेहतर बनाने और लागत कम करने वाला महत्वपूर्ण साधन बताया। इसके साथ ही भारत की डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (डीपीआई) को लगातार सशक्त करने पर भी जोर दिया गया, ताकि डिजिटल सेवाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि वर्ष 2025 में विभिन्न क्षेत्रों में हुए अभूतपूर्व सुधार और आने वाले वर्षों में उनका बेहतर एकीकरण भारत को वैश्विक अर्थव्यवस्था में अग्रणी बनाए रखेगा। इससे न केवल विकास की गति तेज होगी, बल्कि आर्थिक आधार भी मजबूत होगा और नए अवसरों के द्वार खुलेंगे।
कुल मिलाकर, नीति आयोग में हुआ यह संवाद इस बात का संकेत है कि सरकार, नीति-निर्माता और विशेषज्ञ एक साझा दृष्टि के साथ आगे बढ़ रहे हैं। दीर्घकालीन आर्थिक सुधार, तकनीकी नवाचार और वैश्विक एकीकरण के संतुलन से ही ‘विकसित भारत 2047’ का सपना साकार हो सकेगा। यह मार्ग कठिन अवश्य है, लेकिन स्पष्ट दिशा और दृढ़ संकल्प के साथ भारत इस लक्ष्य को हासिल कर सकता है।
