पितरों की विदाई के साथ सजने लगे घर-आंगन, कल होगा माता रानी का आगमन

 -शहर से गांव तक नवरात्र की धूम, माता के स्वागत में सजने लगे पूजा पंडाल और देवी के दरबार

विनोद कुमार झा 

पितरों की विदाई के साथ ही अब घर-आंगन में उत्सव की रौनक लौटने लगी है। श्राद्ध पक्ष के समापन के बाद वातावरण में भक्ति, आस्था और उल्लास का नया रंग घुलने लगा है। रविवार, 11 अक्टूबर से शारदीय नवरात्र का शुभारंभ होने जा रहा है। मां दुर्गा के आगमन को लेकर शहर से गांव तक तैयारियां तेज हो गई हैं। कहीं घरों की साफ-सफाई और सजावट की जा रही है, तो कहीं पूजा पंडालों को अंतिम रूप देने में कारीगर जुटे हुए हैं। बाजारों में भी पूजन सामग्री, चुनरी, नारियल, कलश, फूल-माला और सजावटी सामान की दुकानें सजने लगी हैं। हर तरफ माता रानी के स्वागत की तैयारी दिखाई देने लगी है।

नवरात्र केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, श्रद्धा, शक्ति और सामाजिक एकता का प्रतीक भी है। पितृ पक्ष में पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के बाद अब भक्त मां दुर्गा की आराधना में लीन होने की तैयारी कर रहे हैं। घरों में पूजा स्थल की सफाई, कलश स्थापना के लिए आवश्यक सामग्री जुटाने और व्रत-पूजन की तैयारियां शुरू हो गई हैं। श्रद्धालु माता रानी के आगमन को लेकर उत्साहित हैं। भक्तों की मान्यता है कि नवरात्र में मां दुर्गा की सच्चे मन से आराधना करने से जीवन में सुख, शांति, साहस और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

शहरों की गलियों से लेकर गांवों के चौक-चौराहों तक नवरात्र का उत्साह नजर आने लगा है। विभिन्न मोहल्लों में पूजा समितियां माता दुर्गा की प्रतिमा स्थापना और पंडाल निर्माण की तैयारियों में जुटी हैं। कहीं आकर्षक विद्युत सजावट की योजना बनाई जा रही है, तो कहीं धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की जा रही है। कई स्थानों पर पंडालों को पारंपरिक और आधुनिक रूप देने की तैयारी है। माता के दरबार को आकर्षक बनाने के लिए रंग-बिरंगी रोशनी, फूलों और सजावटी वस्तुओं का इस्तेमाल किया जा रहा है। शाम होते ही बाजारों और पूजा स्थलों के आसपास बढ़ती चहल-पहल त्योहार के करीब आने का एहसास कराने लगी है।

ग्रामीण क्षेत्रों में भी नवरात्र को लेकर विशेष उत्साह है। गांवों में मंदिरों की साफ-सफाई, पूजा स्थलों की सजावट और सामूहिक आयोजन की तैयारियां चल रही हैं। श्रद्धालु अपने-अपने घरों में मां दुर्गा की पूजा के लिए आवश्यक सामग्री जुटा रहे हैं। महिलाओं में व्रत और पूजन को लेकर उत्साह है, वहीं युवाओं की टोलियां पूजा पंडालों की व्यवस्था और सजावट में सहयोग कर रही हैं। बच्चों में भी पर्व को लेकर खास उमंग दिखाई दे रही है। इस तरह नवरात्र की तैयारियां धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक सहभागिता का भी सुंदर उदाहरण बन रही हैं।

रविवार से शुरू होने वाले शारदीय नवरात्र में नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाएगी। नवरात्र के पहले दिन मां शैलपुत्री की आराधना के साथ पर्व का शुभारंभ होगा। श्रद्धालु घरों और मंदिरों में कलश स्थापना कर मां दुर्गा का आह्वान करेंगे। नौ दिनों तक पूजा-पाठ, दुर्गा सप्तशती का पाठ, मंत्र-जप, भजन-कीर्तन और आरती के माध्यम से भक्त माता की उपासना करेंगे। कई स्थानों पर दुर्गा पूजा के दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रमों और धार्मिक आयोजनों की भी परंपरा है।

नवरात्र के दौरान मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ने की संभावना है। भक्त सुबह और शाम माता के दर्शन के लिए पहुंचेंगे। व्रत रखने वाले श्रद्धालु अपनी धार्मिक परंपराओं के अनुसार खान-पान और पूजन के नियमों का पालन करेंगे। घरों में मां दुर्गा की चौकी सजाई जाएगी और नौ दिनों तक अखंड ज्योति प्रज्वलित करने वाले भक्त विशेष तैयारियों में जुटे हैं। पर्व को लेकर धार्मिक संस्थाओं और पूजा समितियों की सक्रियता भी बढ़ गई है।

नवरात्र का पर्व शक्ति की उपासना के साथ समाज को सद्भाव, अनुशासन और सकारात्मकता का संदेश भी देता है। मां दुर्गा के नौ स्वरूप नारी शक्ति, साहस, करुणा, ज्ञान और अन्याय के विरुद्ध संघर्ष की प्रेरणा देते हैं। ऐसे में यह पर्व केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं, बल्कि समाज में नारी सम्मान और मानवीय मूल्यों को मजबूत करने का अवसर भी है।

माता रानी के स्वागत की तैयारियों के बीच पूजा समितियों और श्रद्धालुओं के लिए स्वच्छता, सुरक्षा तथा पर्यावरण संरक्षण पर ध्यान देना भी जरूरी है। पूजा पंडालों में बिजली की सुरक्षित व्यवस्था, अग्नि सुरक्षा, साफ-सफाई और भीड़ प्रबंधन के इंतजाम पर्व को अधिक व्यवस्थित बना सकते हैं। साथ ही, सजावट में पर्यावरण के अनुकूल सामग्री का इस्तेमाल और धार्मिक आयोजनों में आपसी भाईचारा बनाए रखना उत्सव की गरिमा बढ़ाएगा।

श्राद्ध पक्ष में पूर्वजों के प्रति श्रद्धा अर्पित करने के बाद अब भक्त मां दुर्गा की आराधना के लिए तैयार हैं। घरों के आंगन से लेकर शहरों और गांवों के पूजा पंडालों तक उत्सव का रंग चढ़ने लगा है। हर ओर एक ही भाव दिखाई दे रहा है मां आएंगी, खुशियां लाएंगी और भक्तों के जीवन में नई ऊर्जा का संचार करेंगी। अब श्रद्धालुओं को इंतजार है उस शुभ घड़ी का, जब शंखनाद, घंटियों की ध्वनि और मां के जयकारों के बीच नवरात्र का पावन पर्व आरंभ होगा।

जय माता दी!

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