खबर मार्निंग। शारदीय नवरात्रि का पांचवां दिन मां दुर्गा के पांचवें स्वरूप मां स्कंदमाता की आराधना को समर्पित है। गुरुवार, 15 अक्टूबर को श्रद्धालु मां स्कंदमाता की विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर सुख, समृद्धि, संतान सुख और परिवार की खुशहाली की कामना करेंगे। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां स्कंदमाता की उपासना से भक्तों को ममता, करुणा, ज्ञान और सकारात्मक ऊर्जा का आशीर्वाद प्राप्त होता है। मां अपने भक्तों के जीवन से बाधाओं को दूर कर उन्हें धर्म और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती हैं।
पंचांग के अनुसार, आज आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि है, जो 16 अक्टूबर की सुबह 3 बजकर 25 मिनट तक रहेगी। इसके बाद षष्ठी तिथि आरंभ होगी। ज्येष्ठा नक्षत्र पूरे दिन और रात रहेगा। सौभाग्य योग रात 9 बजकर 15 मिनट तक रहेगा, जिसके बाद शोभन योग का आरंभ होगा। चंद्रमा वृश्चिक राशि में विराजमान रहेगा। गुरुवार का दिन भगवान विष्णु की आराधना के लिए भी विशेष माना जाता है। ऐसे में श्रद्धालु मां स्कंदमाता की पूजा के साथ भगवान विष्णु का स्मरण कर सकते हैं।
सूर्योदय एवं सूर्यास्त: आज सूर्योदय सुबह 6 बजकर 22 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 5 बजकर 52 मिनट पर होगा।
आज के शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:42 बजे से 5:32 बजे तक।
- अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:44 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक।
- विजय मुहूर्त: दोपहर 2:02 बजे से 2:48 बजे तक।
- अमृत काल: रात 8:59 बजे से 10:46 बजे तक।
- निशिता मुहूर्त: रात 11:42 बजे से देर रात 12:32 बजे तक।
आज के अशुभ काल
- राहुकाल: दोपहर 1:33 बजे से 2:59 बजे तक।
- यमगण्ड: सुबह 6:22 बजे से 7:48 बजे तक।
- गुलिक काल: सुबह 9:14 बजे से 10:40 बजे तक।
- दुष्टमुहूर्त: सुबह 10:12 बजे से 10:58 बजे तक।
- दूसरा दुष्टमुहूर्त: दोपहर 2:48 बजे से 3:34 बजे तक।
- दिशाशूल: उत्तर दिशा।
नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा में लाल या पीले पुष्प अर्पित करना, धूप-दीप जलाना और दुर्गा सप्तशती अथवा मां के मंत्रों का पाठ करना शुभ माना जाता है। भक्त मां को केले का भोग अर्पित कर सकते हैं। मां स्कंदमाता की कृपा प्राप्त करने के लिए श्रद्धालु श्रद्धा और भक्ति के साथ प्रार्थना करें। धार्मिक मान्यता है कि मां की आराधना से मन को शांति मिलती है और परिवार में सुख-समृद्धि का वातावरण बनता है।
