13 अक्टूबर 2026 का पंचांग: नवरात्रि का तीसरा दिन आज, मां चंद्रघंटा की आराधना से गूंजेंगे मंदिर

आश्विन शुक्ल तृतीया तिथि रात 11:27 बजे तक, शाम को तुला से वृश्चिक राशि में प्रवेश करेंगे चंद्रमा; अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:44 से दोपहर 12:30 बजे तक

शारदीय नवरात्रि का तीसरा दिन मां दुर्गा के तीसरे स्वरूप मां चंद्रघंटा की आराधना के लिए समर्पित है। नवरात्रि के इस पावन अवसर पर श्रद्धालु मां की पूजा-अर्चना कर सुख, शांति, समृद्धि और साहस का आशीर्वाद मांगते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां चंद्रघंटा का स्वरूप शक्ति, पराक्रम और शांति का प्रतीक है। उनके मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र सुशोभित रहता है, जिसके कारण उन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। मां का सिंह पर सवार स्वरूप भक्तों को निर्भीकता, आत्मविश्वास और अन्याय के विरुद्ध खड़े होने की प्रेरणा देता है। नवरात्रि के तीसरे दिन मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, मंत्र जाप, दुर्गा चालीसा का पाठ और आरती के माध्यम से भक्त मां की आराधना करते हैं।

पंचांग के अनुसार, मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 को आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि रात 11 बजकर 27 मिनट तक रहेगी। इसके बाद चतुर्थी तिथि का आरंभ होगा। विशाखा नक्षत्र 14 अक्टूबर की रात 1 बजकर 43 मिनट तक रहेगा, इसके बाद अनुराधा नक्षत्र शुरू होगा। प्रीति योग रात 8 बजकर 24 मिनट तक रहेगा, जिसके बाद आयुष्मान योग आरंभ होगा। चंद्रमा शाम 7 बजकर 12 मिनट तक तुला राशि में रहेंगे और इसके बाद वृश्चिक राशि में प्रवेश करेंगे।

मंगलवार को सूर्योदय और सूर्यास्त के समय को लेकर उपलब्ध विवरण में अंतर है। दिए गए पंचांग विवरण के अनुसार, सूर्योदय सुबह 6 बजकर 20 मिनट से 6 बजकर 24 मिनट के बीच तथा सूर्यास्त शाम 5 बजकर 49 मिनट से 5 बजकर 54 मिनट के बीच बताया गया है। स्थानीय पंचांग के अनुसार सही समय की पुष्टि करना उचित रहेगा। चंद्रोदय सुबह 8 बजकर 45 मिनट और चंद्रास्त शाम 7 बजकर 18 मिनट बताया गया है।

दिन का अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 44 मिनट से दोपहर 12 बजकर 30 मिनट तक रहेगा। हालांकि, दिए गए विवरण के अनुसार, गुलिक काल दोपहर 12 बजकर 7 मिनट से शुरू हो रहा है। इसलिए दोनों समय-अवधियों को ध्यान में रखते हुए अभिजीत मुहूर्त का शुरुआती हिस्सा, सुबह 11 बजकर 44 मिनट से दोपहर 12 बजकर 6 मिनट तक, चुना जा सकता है। धार्मिक कार्यों के लिए मुहूर्त का चयन करते समय स्थानीय पंचांग और अपनी परंपरा का ध्यान रखना चाहिए।

दिन के अशुभ काल में राहुकाल दोपहर 3 बजकर 1 मिनट से शाम 4 बजकर 27 मिनट तक रहेगा। यमगण्ड सुबह 9 बजकर 14 मिनट से 10 बजकर 41 मिनट तक और गुलिक काल दोपहर 12 बजकर 7 मिनट से 1 बजकर 34 मिनट तक रहेगा। सुबह का दुष्टमुहूर्त 8 बजकर 39 मिनट से 9 बजकर 25 मिनट तक बताया गया है। दिशाशूल उत्तर दिशा में रहेगा। परंपरागत मान्यताओं के अनुसार, इन अवधियों में शुभ कार्यों की शुरुआत करने से बचा जाता है। हालांकि, दैनिक कार्यों की योजना बनाते समय स्थानीय पंचांग और परिस्थितियों को भी ध्यान में रखना चाहिए।

मां चंद्रघंटा की पूजा के लिए सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा स्थल पर मां की प्रतिमा या चित्र स्थापित कर दीपक जलाएं। मां को पुष्प, अक्षत, धूप, दीप और फल अर्पित कर श्रद्धापूर्वक पूजा करें। इसके बाद मां के मंत्र का जाप और आरती करें। मां चंद्रघंटा का मंत्र है— 'ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः॥' धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धा और एकाग्रता के साथ मां का स्मरण करने से मन को शांति मिलती है और व्यक्ति में कठिन परिस्थितियों का सामना करने का साहस जागृत होता है।

नवरात्रि का यह दिन केवल पूजा-पाठ ही नहीं, बल्कि आत्मबल, संयम और सकारात्मक सोच को अपनाने की प्रेरणा भी देता है। मां चंद्रघंटा का दिव्य स्वरूप संदेश देता है कि जीवन में शांति और करुणा के साथ साहस तथा विवेक का होना भी आवश्यक है। मां की आराधना करते हुए श्रद्धालु परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और कल्याण की कामना करते हैं। नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा से प्रार्थना है कि सभी के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहे तथा प्रत्येक व्यक्ति को सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने की शक्ति प्राप्त हो।

जय माता दी!

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