निशिकांत ठाकुर
किसी चीज का निर्णय ठीक से करने के लिए उसे तस्वीरों के जरिये समझने की कोशिश जरूरी होता है यह शिक्षा हासिल करने का सही तरीका भी है। सबसे पहले इसे समझते हैं कि आखिर भारत का एक युवा अपनी उच्च शिक्षा के लिए विदेश जाता है और वहां भारत विरोधी जारी गतिविधियों या कहिए कि कुसंगति में पड़कर भारत के लिए ही विषवमन करने लगता है, जिसका नाम बुरहाम हमजा उर्फ असली नाम अर्जुमंद गुलज़ार डार, उर्फ 'डॉक्टर' प्रतिबंधित आतंकी संगठन 'अल-बद्र' का एक खूंखार कमांडर और भारत के मोस्ट वांटेड आतंकियों में से एक बन गया था। उसे भारत की केंद्रीय एजेंसियों द्वारा वर्ष 2019 के पुलवामा आतंकी हमले की साजिश में शामिल होने का मुख्य मास्टरमाइंड माना जाता था। पिछले सप्ताह मई 2026 में ही पाकिस्तान अधिकृत मुज़फ़्फ़राबाद में अज्ञात बंदूकधारियों ने उसे मार गिराया। किसने मारा, यह एक अलग मुद्दा हो सकता है, लेकिन यह चिंतित करने वाली बात है कि कोई भी भारतीय अपने ही देश के विरुद्ध पाकिस्तान जाकर आतंकी गतिविधियों में शामिल होकर पुलवामा जैसा जघन्य कांड को अंजाम कैसे दे सकता है? गंभीर विषय यही नहीं है, बल्कि यह है कि जहां उसका जन्म हुआ, जहां वह पला—बढ़ा, उसी जगह अपने दुष्कृत्य को अंजाम देने कैसे पहुंच गया? धिक्कार है ऐसे देशद्रोहियों को, जो इस तरह के दुष्कर्म करके जीवित रह कर सुख की जिंदगी जीता है।
वह जम्मू-कश्मीर के पुलवामा ज़िले के रत्नीपोरा का रहने वाला था। उच्च शिक्षा (पोस्ट-ग्रेजुएशन) करने के बहाने 2017 में वह पाकिस्तान चला गया और आतंकी गतिविधियों में शामिल हो गया। पाकिस्तान अधिकृत क्षेत्र में बैठकर वह अल-बद्र का कमांडर बन गया। वह जम्मू-कश्मीर के युवाओं को आतंकी संगठनों में शामिल होने के लिए भड़काता था और आतंकी फंडिंग का काम संभालता था। भारत सरकार ने गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यूपीएके तहत 2022 में उसे एक आतंकी घोषित किया था। भारत में कई बड़े हमलों का आरोपी यह आतंकी काफी समय से पाकिस्तान में छिपा हुआ था, जिसे मई 2026 के तीसरे सप्ताह में पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के मुज़फ़्फ़राबाद में अज्ञात हमलावरों ने मौत के घाट उतार दिया। खुफिया सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई बुरहाम हमजा को लंबे समय तक पाक अधिकृत कश्मीर के मुजफ्फराबाद के एक स्कूल का प्रिंसिपल बनाका सबसे छुपाकर रखा गया था। इसी आड़ में वह भारत में आतंकी ऑपरेशन चलाता रहता था। उसकी सिक्योरिटी में एके—47 से लैस गार्ड तैनात थे। बुरहान हमजा की हत्या के बाद सोशल मीडिया पर सनसनीखेज दावा आया है, जो लारेंस बिश्नोई से जुड़े बताए जा रहे हैं। उस दावे में टायसन बिश्नोई नामक एक शख्स ने दावा किया है कि इस हत्या के पीछे उसका गैंग है। पोस्ट में कहा गया है कि जो भी देश के खिलाफ साजिश रचेगा, उसे दुनिया के किसी भी कोने बख्शा नहीं जाएगा। बुरहान हमजा की हत्या को पाकिस्तान के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।
यह तो निर्विवाद है कि पाकिस्तान का जन्म ही भारत विरोध से हुआ है, लेकिन एक लंबा समय निकल गया, लेकिन कबतक पाकिस्तान से अपनी ऐतिहासिक खुन्नस निकलता रहेगा? भारतवर्ष डेढ़ सौ करोड़ की आबादी वाला देश है, उसे कहां फुर्सत है कि वह पाकिस्तान जैसे कट्टरपंथियों के लिए अपना वक्त जाया करे। वह अपने देश के विकास के लिए, उसके चहुंमुखी विकास के लिए अपने युवाओं को रोजगार के लिए प्रयत्नशाशील है, लेकिन पाकिस्तान अपनी जन्मजात दुश्मनी भारत से मनाकर यहां के युवाओं को बरगलाता रहता है, उसे आतंकी बनाने के फिराक में रहता है। यह बात हर देश में और विशेष रूप से अपने देश में प्रचलित है कि गरीबी और बेरोजगारी से ऊबकर युवा गुमराह होकर आतंकवाद की राह अपनाने लगते हैं, लेकिन वहीं जब बुरहाम हमजा की बात करे तो यहां सत्य गौण हो जाता है। क्योंकि; बुरहाम हमजा पढ़ा—लिखा और माध्यम वर्गीय परिवार से आने वाला युवा था, जो अपनी तथाकथित उच्च शिक्षा के लिए पाकिस्तान गया था, लेकिन यह क्या! वह तो आतंकियों द्वारा गुमराह होने के चक्कर में स्वयं आतंकी कमांडर हो गया।
बताते चलें कि जब से भारत से कटकर पाकिस्तान बना अपना प्रयास कभी भी नहीं रहा कि हम अपनी तरफ से पाकिस्तान पर आक्रमण करें। लेकिन, पाकिस्तान बार—बार नियमों को धता बताकर भारत पर अंधाधुंध आक्रमण करके हमारे जानमाल को नुकसान पहुंचाता रहा। फिर वही विभिन्न संगठनों, संस्थाओं के पास जाकर विलाप करता रहता है कि भारत उसके यहां घुसपैठ करता है। जबकि, सच तो यह है कि 1947 से लेकर आज तक कोई वर्ष ऐसा बीता नहीं, जिन वर्षों के लिए यह कहा जाए कि इस वर्ष पाकिस्तान ने भारत में घुसकर आतंकी कार्यवाही को अंजाम नहीं दिया हो। भारत की सीमा में घुसपैठ करना यह एक आम बात पाकिस्तान की हो गई है। कश्मीर की वादियों में पर्यटक के रूप में आनंद लेने जाना पिछले कुछ वर्षों एक भयावह सपना बन गया है। पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठनों और आईएसआई द्वारा कश्मीर और पंजाब में कई बड़े आतंकी हमलों, फिदायीन हमलों और विस्फोटों को अंजाम दिया गया है। इन घटनाओं का मुख्य उद्देश्य सुरक्षा बलों को निशाना बनाना और भारत में सांप्रदायिक सौहार्द्र को बिगाड़ना रहा है। कुछ मुख्य वारदात को देखें तो 2025 पहलगाम नरसंहार सबसे पहले जेहन में आता है। लश्कर-ए-तैयबा और टीआरएफ के आतंकियों ने पहलगाम (बैसरन घाटी) के पर्यटक स्थल पर हमला करके 26 लोगों की बेरहमी से हत्या कर दी थी। 2019 पुलवामा हमला को जैश-ए-मोहम्मद के फिदायीन ने विस्फोटकों से भरी गाड़ी सीआरपीएफ की बस से टकरा दी थी, जिसमें 40 जवान शहीद हो गए थे। 2016 का उरी हमले में जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों ने उरी स्थित सेना के ब्रिगेड मुख्यालय पर हमला कर 19 भारतीय सैनिकों को शहीद कर दिया था। 2016 नगरोटा हमले में आतंकियों द्वारा सेना के कैंप में घुसकर गोलीबारी और बंधक बनाने की घटना को अंजाम दिया गया, जिसमें सात जवान शहीद हुए थे। 2025/2026 की घटनाएं, पंजाब पुलिस द्वारा आईएसआई समर्थित कई मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया गया, जिनका उद्देश्य हथगोले फेंककर (ग्रेनेड अटैक) और सीमा पार से ड्रोन के जरिये हथियारों/विस्फोटकों की तस्करी कर अशांति फैलाना था। 2016 पठानकोट हमला, जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों ने भारतीय वायु सेना के एयरबेस पर घुसकर हमला किया, जिसमें 7 सुरक्षाकर्मी शहीद हो गए थे।
अपने कार्यकाल का एक संस्मरण न सुनाना पाठकों के साथ नाइंसाफी होगी। वर्ष 2000 की बात है, वाघा बॉर्डर के पास घमते हुए एक पाकिस्तानी रेंजर से मैंने पूछा कि इतनी अच्छी सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद आखिर आपकी तरफ से बार—बार आतंकियों की घुसपैठ भारत में क्यों और कैसे होती रहती है? रेंजर का उत्तर सुंकर मैं दंग रह गया। उसका कहना था कि यह फेंसिंग भारत ने अपनी सुरक्षा के लिए बनवाया है, तो पाकिस्तान उसकी सुरक्षा क्यों करे? फिर यही प्रश्न धारा—370 हटने के बाद कश्मीर बॉर्डर के पास भारतीय एक साधारण से व्यापारियों से पूछा तो उनका कहना था कि हमारे यहां आतंकी राजनीतिज्ञों की साजिश की वजह से घुसते हैं। कंगाल पाकिस्तान के पास इतनी हैसियत नहीं है कि वह अपने देश से णन देकर दहशतगर्दों को भेजकर हमारे यहां दहशत फैलाए। यह सब क्या वाकई कुछ राजनीतिज्ञों की मिलीभगत के कारण होता है! अन्यथा, क्या मजाल कि हमारी सीमा में ही घुसकर हमारे ही देश में खून की होली खेले। ऐसी स्थिति को ध्यान में रखते हुए यदि पाकिस्तान अधिकृत मुजफ्फराबाद में बुरहान हमजा को जो पाल—पोसकर खूंखार बनाया जा रहा था उसे जिसने भी मारा, उसे अनुचित नहीं कहा जा सकता। यदि बुरहाम हमजा को मारने के लिए लारेंस विश्नोई गैंग ने जिम्मेदारी ली है, तो हो सकता है कि उस गैंग ने भारत के प्रति अपनी प्रतिबद्धता का परिचय दिया हो।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार और स्तंभकार हैं)
