विनोद कुमार झा
भारतीय सनातन परंपरा में एकादशी केवल एक व्रत नहीं, बल्कि आत्मसंयम, भक्ति और आध्यात्मिक जागरण का महान अवसर मानी जाती है। ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष में आने वाली यह पावन एकादशी भगवान विष्णु की आराधना को समर्पित होती है। वर्ष 2026 में 26 मई, मंगलवार को पड़ रही यह एकादशी विशेष महत्व रखती है, क्योंकि यह अधिक मास के आध्यात्मिक प्रभाव से भी जुड़ी हुई है। धर्मग्रंथों में कहा गया है कि इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक किया गया व्रत मन, वचन और कर्म की शुद्धि प्रदान करता है तथा जीवन में सुख, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।
पंचांग के अनुसार एकादशी तिथि का आरंभ 26 मई प्रातः लगभग 5:10 बजे से होगा और यह 27 मई प्रातः तक प्रभावी रहेगी। इस दिन भगवान श्रीहरि विष्णु की पूजा, तुलसी अर्चन, गीता पाठ और हरिनाम संकीर्तन का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि एकादशी का व्रत रखने से व्यक्ति के पाप क्षीण होते हैं और उसे आध्यात्मिक उन्नति की प्राप्ति होती है।
सनातन संस्कृति में एकादशी को “इंद्रियों पर नियंत्रण” का प्रतीक माना गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन अन्न का त्याग कर सात्विक आहार और भक्ति में मन लगाने से शरीर और मन दोनों शुद्ध होते हैं। यही कारण है कि देशभर के मंदिरों और विष्णु धामों में इस दिन विशेष पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और धार्मिक आयोजन किए जाते हैं।
धर्माचार्यों के अनुसार एकादशी केवल कर्मकांड तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन में अनुशासन और सकारात्मक चिंतन का संदेश भी देती है। आज के भागदौड़ और तनावपूर्ण जीवन में यह पर्व आत्ममंथन, संयम और आध्यात्मिक संतुलन की प्रेरणा देता है। उपवास के माध्यम से व्यक्ति अपने भीतर की नकारात्मकता को त्यागकर ईश्वर के निकट पहुंचने का प्रयास करता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय संस्कृति में व्रत और पर्व केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सामाजिक और मानसिक संतुलन बनाए रखने की परंपरा भी हैं। एकादशी का संदेश मानव जीवन को पवित्रता, दया, संयम और सदाचार की ओर प्रेरित करता है। इस पावन अवसर पर श्रद्धालु दान-पुण्य, गौसेवा और जरूरतमंदों की सहायता कर पुण्य अर्जित करते हैं।
ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की यह एकादशी श्रद्धा और भक्ति का ऐसा पावन संगम है, जो व्यक्ति को आत्मिक शांति और ईश्वर के प्रति समर्पण का अनुभव कराती है। यही भारतीय संस्कृति की वह विशेषता है, जो पर्वों के माध्यम से जीवन को आध्यात्मिक ऊर्जा और नैतिक मूल्यों से जोड़ती है।
