धार्मिक आस्था और दैनिक जीवन के संतुलन में पंचांग का विशेष महत्व होता है। भारतीय परंपरा में हर शुभ-अशुभ कार्य, यात्रा, व्रत और पूजन के लिए पंचांग का अवलोकन किया जाता है। आज का दिन आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष है, क्योंकि त्रयोदशी तिथि के साथ प्रदोष काल का संयोग बन रहा है, जो भगवान शिव की आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। आइए जानते हैं आज का विस्तृत पंचांग—
तिथि, वार एवं ग्रह स्थिति
आज वैसाख मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि रात 10 बजकर 31 मिनट तक रहेगी, इसके पश्चात चतुर्दशी तिथि प्रारंभ होगी।
- सूर्योदय: सुबह 05 बजकर 56 मिनट
- सूर्यास्त: शाम 06 बजकर 47 मिनट
- चंद्रोदय: 16 अप्रैल को सुबह 04 बजकर 56 मिनट
- चंद्रास्त: शाम 04 बजकर 35 मिनट
चंद्रमा आज सुबह 09 बजकर 37 मिनट तक कुंभ राशि में रहेंगे, इसके बाद मीन राशि में प्रवेश करेंगे।
नक्षत्र, योग और करण
- नक्षत्र: पूर्व भाद्रपद दोपहर 03:22 बजे तक, इसके बाद उत्तर भाद्रपद
- योग: ब्रह्म योग दोपहर 01:25 बजे तक, तत्पश्चात इन्द्र योग
- करण:
- गर करण सुबह 11:27 बजे तक
- वणिज करण रात 10:31 बजे तक
- इसके बाद विष्टि करण प्रारंभ
पूर्व भाद्रपद नक्षत्र का तृतीय चरण सुबह 09:37 बजे तक तथा चतुर्थ चरण दोपहर 03:22 बजे तक रहेगा।
दिन-रात्रि एवं मध्याह्न
- दिनमान: 12 घंटे 50 मिनट 53 सेकंड
- रात्रिमान: 11 घंटे 08 मिनट 03 सेकंड
- मध्याह्न काल: दोपहर 12 बजकर 21 मिनट
आज के शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:27 बजे से 05:11 बजे तक
- प्रातः सन्ध्या: सुबह 04:49 बजे से 05:56 बजे तक
- विजय मुहूर्त: दोपहर 02:30 बजे से 03:21 बजे तक
- गोधूलि मुहूर्त: शाम 06:46 बजे से 07:08 बजे तक
- अमृत काल: सुबह 07:37 बजे से 09:10 बजे तक
- निशिता मुहूर्त: रात 11:59 बजे से 12:43 बजे (16 अप्रैल)
आज का प्रदोष काल शाम 06:47 बजे से रात 09:00 बजे तक रहेगा, जो भगवान शिव की पूजा के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है।
आज के अशुभ समय
- राहुकाल: दोपहर 12:21 बजे से 01:58 बजे तक
- यमगण्ड: सुबह 07:32 बजे से 09:09 बजे तक
- गुलिक काल: सुबह 10:45 बजे से 12:21 बजे तक
- दुर्मुहूर्त: दोपहर 11:56 बजे से 12:47 बजे तक
- वर्ज्य: 16 अप्रैल रात 12:25 बजे से 01:55 बजे तक
विशेष योग एवं दोष
- भद्रा काल: रात 10:31 बजे से अगले दिन सुबह 05:55 बजे तक
- पंचक: पूरे दिन प्रभावी रहेगा
दिशा एवं अन्य विचार
- दिशा शूल: उत्तर दिशा में
- नक्षत्र शूल: दोपहर 03:22 बजे तक दक्षिण दिशा में
- चन्द्र वास:
- सुबह 09:37 बजे तक पश्चिम
- इसके बाद उत्तर दिशा
- राहु वास: दक्षिण-पश्चिम दिशा
- अग्निवास: रात 10:31 बजे तक आकाश में, तत्पश्चात पाताल में
- शिववास: रात 10:31 बजे तक भोजन में, इसके बाद श्मशान में
धार्मिक महत्व
आज त्रयोदशी तिथि के साथ प्रदोष काल का संयोग विशेष फलदायी है। इस समय भगवान शिव की पूजा, रुद्राभिषेक और व्रत करने से सभी कष्टों का निवारण होता है तथा मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। पंचक और भद्रा जैसे योगों के कारण शुभ कार्यों में सावधानी बरतना उचित रहेगा।
नोट: यह पंचांग वैदिक गणनाओं पर आधारित है, स्थान अनुसार समय में आंशिक परिवर्तन संभव है।
