2 नवंबर 2026 का पंचांग: कार्तिक कृष्ण अष्टमी आज, दोपहर बाद नवमी तिथि का आरंभ

सोमवार को अश्लेषा नक्षत्र और शुभ योग का संयोग, जानिए आज के शुभ-अशुभ मुहूर्त एवं दिशाशूल

सनातन धर्म में पंचांग का विशेष धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व है। पंचांग के माध्यम से दिन की तिथि, नक्षत्र, योग, करण, सूर्योदय-सूर्यास्त और शुभ-अशुभ समय की जानकारी प्राप्त होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शुभ मुहूर्त में पूजा-पाठ, मांगलिक कार्य एवं आध्यात्मिक अनुष्ठान करना विशेष फलदायी माना जाता है। सोमवार, 2 नवंबर 2026 को कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि दोपहर तक रहेगी, जिसके बाद नवमी तिथि का आरंभ होगा। आज अश्लेषा नक्षत्र, शुभ योग और कौलव करण का संयोग बन रहा है। वहीं, सोमवार के दिन पूर्व दिशा में दिशाशूल रहेगा।

आज का पंचांग

  • दिन: सोमवार

  • मास: कार्तिक

  • पक्ष: कृष्ण पक्ष

  • तिथि: अष्टमी दोपहर 01 बजकर 10 मिनट तक, इसके बाद नवमी तिथि प्रारंभ।

  • नक्षत्र: अश्लेषा रात्रि 03 बजकर 46 मिनट तक (3 नवंबर), इसके बाद मघा नक्षत्र।

  • करण: कौलव दोपहर 01 बजकर 10 मिनट तक, इसके बाद तैतिल करण रात्रि 12 बजकर 29 मिनट तक (3 नवंबर)।

  • योग: शुभ दोपहर 12 बजकर 07 मिनट तक, इसके बाद शुक्ल योग।

  • सूर्योदय: प्रातः 06 बजकर 34 मिनट।

  • सूर्यास्त: सायं 05 बजकर 36 मिनट।

  • चन्द्रोदय: रात्रि 12 बजकर 46 मिनट (3 नवंबर)।

  • चन्द्रास्त: दोपहर 01 बजकर 24 मिनट।

  • शिववास: गौरी के साथ दोपहर 01 बजकर 10 मिनट तक, इसके बाद सभा में।

आज के शुभ योग एवं मुहूर्त

धार्मिक कार्यों, पूजा-अर्चना एवं मांगलिक गतिविधियों के लिए आज के प्रमुख शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं:

  • ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 04 बजकर 51 मिनट से 05 बजकर 42 मिनट तक।

  • अभिजीत मुहूर्त: पूर्वाह्न 11 बजकर 43 मिनट से दोपहर 12 बजकर 27 मिनट तक।

  • विजय मुहूर्त: दोपहर 01 बजकर 56 मिनट से 02 बजकर 40 मिनट तक।

  • गोधूलि मुहूर्त: सायं 05 बजकर 36 मिनट से 06 बजकर 02 मिनट तक।

  • अमृत काल: रात्रि 02 बजकर 13 मिनट से 03 बजकर 46 मिनट तक (3 नवंबर)।

  • निशिता मुहूर्त: रात्रि 11 बजकर 40 मिनट से मध्यरात्रि 12 बजकर 32 मिनट तक (3 नवंबर)।

आज के अशुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार, आज निम्नलिखित समय में शुभ कार्यों से बचने की धार्मिक मान्यता है:

  • राहुकाल: प्रातः 07 बजकर 57 मिनट से 09 बजकर 20 मिनट तक।

  • यमगण्ड: पूर्वाह्न 10 बजकर 42 मिनट से दोपहर 12 बजकर 05 मिनट तक।

  • गुलिक काल: दोपहर 01 बजकर 28 मिनट से 02 बजकर 51 मिनट तक।

  • आडल योग: प्रातः 06 बजकर 34 मिनट से रात्रि 03 बजकर 46 मिनट तक (3 नवंबर)।

  • विडाल योग: रात्रि 03 बजकर 46 मिनट से प्रातः 06 बजकर 35 मिनट तक (3 नवंबर)।

  • दुर्मुहूर्त: दोपहर 12 बजकर 27 मिनट से 01 बजकर 11 मिनट तक।

  • वर्ज्य काल: सायं 04 बजकर 55 मिनट से 06 बजकर 28 मिनट तक।

  • गण्ड मूल: पूरे दिन।

  • दिशाशूल: पूर्व दिशा।

धार्मिक मान्यता: सोमवार का दिन भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। इस दिन शिवभक्त भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक, रुद्राभिषेक एवं मंत्र-जप कर सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं। कार्तिक मास में भगवान शिव एवं भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है।

नोट: पंचांग में दिए गए मुहूर्त एवं समय धार्मिक गणनाओं पर आधारित हैं। स्थानीय सूर्योदय एवं भौगोलिक स्थिति के अनुसार समय में अंतर संभव है।

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