आज का पंचांग, 9 अक्टूबर 2026: पितृ पक्ष में चतुर्दशी श्राद्ध, जानें शुभ-अशुभ मुहूर्त और दिशाशूल

अकाल मृत्यु को प्राप्त पितरों के निमित्त होगा श्राद्ध-तर्पण, रात 9:36 बजे तक चतुर्दशी तिथि; इसके बाद अमावस्या का आरंभ

 पितृ पक्ष भारतीय संस्कृति में पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता और पारिवारिक संस्कारों को स्मरण करने का विशेष अवसर है। मान्यता है कि इस अवधि में पितरों के निमित्त श्रद्धापूर्वक किए गए श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान और दान-पुण्य के माध्यम से पूर्वजों के प्रति सम्मान व्यक्त किया जाता है। पितृ पक्ष का प्रत्येक दिन धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्त्व रखता है। इसी क्रम में शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2026 को आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर चतुर्दशी श्राद्ध किया जाएगा। इसे घात चतुर्दशी और शस्त्र हत श्राद्ध के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन उन पितरों के निमित्त श्राद्ध और तर्पण किया जाता है, जिनकी मृत्यु दुर्घटना, शस्त्राघात अथवा अन्य असामयिक परिस्थितियों में हुई हो।

चतुर्दशी श्राद्ध के अवसर पर परिवार के लोग अपने दिवंगत पूर्वजों को श्रद्धापूर्वक याद करते हैं और अपनी पारिवारिक परंपराओं के अनुसार श्राद्ध कर्म संपन्न करते हैं। इस दिन तर्पण, पिंडदान, अन्नदान और जरूरतमंदों को भोजन कराने जैसे कार्यों का विशेष महत्त्व माना जाता है। पितृ पक्ष का यह अवसर पूर्वजों के योगदान को याद करने के साथ-साथ परिवार के बुजुर्गों के सम्मान, सेवा और नई पीढ़ी तक संस्कार पहुंचाने का संदेश भी देता है।

आज की तिथि, नक्षत्र और योग : पंचांग के अनुसार, शुक्रवार को आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि रात 9 बजकर 36 मिनट तक रहेगी। इसके बाद अमावस्या तिथि का आरंभ होगा। उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र रात 9 बजकर 19 मिनट तक रहेगा, जिसके बाद हस्त नक्षत्र प्रारंभ होगा। ब्रह्म योग रात 11 बजकर 21 मिनट तक रहेगा। इसके बाद इंद्र योग का आरंभ होगा।

विष्टि यानी भद्रा करण सुबह 9 बजकर 52 मिनट तक रहेगा, जिसके बाद शकुनि करण प्रारंभ होगा। चंद्रमा पूरे दिन और रात कन्या राशि में संचार करेगा।

सूर्य और चंद्रमा की स्थिति :  शुक्रवार को सूर्योदय सुबह 6 बजकर 18 मिनट पर होगा, जबकि सूर्यास्त शाम 5 बजकर 58 मिनट पर होगा। चंद्रोदय अगले दिन, 10 अक्टूबर को सुबह 5 बजकर 53 मिनट पर होगा। चंद्रास्त का समय शाम 4 बजकर 59 मिनट बताया गया है।

आज का शुभ मुहूर्त :  शुक्रवार को अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 50 मिनट से दोपहर 12 बजकर 37 मिनट तक रहेगा। इस अवधि को परंपरागत रूप से शुभ कार्यों के लिए महत्त्वपूर्ण माना जाता है। अमृत काल दोपहर 2 बजकर 7 मिनट से 3 बजकर 43 मिनट तक रहेगा।

आज का चौघड़िया मुहूर्त

- चर: सुबह 6 बजकर 18 मिनट से 7 बजकर 46 मिनट तक।

- लाभ: सुबह 7 बजकर 46 मिनट से 9 बजकर 13 मिनट तक।

- अमृत: सुबह 9 बजकर 13 मिनट से 10 बजकर 41 मिनट तक।

- काल: सुबह 10 बजकर 41 मिनट से दोपहर 12 बजकर 8 मिनट तक।

आज का अशुभ मुहूर्त :  पंचांग के अनुसार, शुक्रवार को राहुकाल सुबह 10 बजकर 41 मिनट से दोपहर 12 बजकर 8 मिनट तक रहेगा। गुलिक काल सुबह 7 बजकर 30 मिनट से 9 बजे तक तथा यमगंड दोपहर 3 बजे से शाम 4 बजकर 30 मिनट तक रहेगा।

दिशाशूल: शुक्रवार को पश्चिम दिशा का दिशाशूल माना जाता है। पारंपरिक मान्यता के अनुसार, इस दिन पश्चिम दिशा की यात्रा करते समय दिशाशूल संबंधी नियमों का ध्यान रखा जाता है।

पितृ पक्ष की चतुर्दशी तिथि को घात चतुर्दशी अथवा शस्त्र हत श्राद्ध के रूप में जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह श्राद्ध विशेष रूप से उन पूर्वजों के निमित्त किया जाता है, जिनकी मृत्यु असामयिक परिस्थितियों में हुई हो। दुर्घटना, शस्त्राघात, हिंसा या अन्य अप्रत्याशित कारणों से दिवंगत हुए पितरों के लिए इस दिन श्राद्ध और तर्पण करने की परंपरा है।

इस अवसर पर लोग अपनी पारिवारिक परंपरा और सामर्थ्य के अनुसार पितरों का तर्पण करते हैं। जरूरतमंदों को भोजन कराना, अन्न-वस्त्र का दान करना और दिवंगत परिजनों का स्मरण करना भी इस दिन के धार्मिक कर्मों में शामिल है। श्राद्ध कर्म में श्रद्धा, पवित्रता और संकल्प को विशेष महत्त्व दिया जाता है।

पितृ पक्ष का संदेश केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है। यह समय अपने पूर्वजों के त्याग और योगदान को याद करने, परिवार की परंपराओं को समझने तथा आने वाली पीढ़ियों तक संस्कार पहुंचाने का अवसर भी है। पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के साथ जीवित माता-पिता, बुजुर्गों और जरूरतमंदों की सेवा करना भी इसी भावना का महत्त्वपूर्ण हिस्सा है।

विशेष सूचना: पंचांग में दिए गए समय स्थानीय स्थान और पंचांग पद्धति के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं। श्राद्ध कर्म के लिए उपयुक्त समय और विधि की पुष्टि स्थानीय पंचांग अथवा योग्य आचार्य से कर लेना उचित रहेगा।

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