खबर मॉर्निंग | विशेष पंचांग
भाद्रपद कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि के साथ सोमवार, 31 अगस्त 2026 का दिन शुरू होगा। पंचांग के अनुसार तृतीया तिथि सुबह 08 बजकर 50 मिनट तक रहेगी, इसके बाद चतुर्थी तिथि प्रारंभ हो जाएगी। रेवती नक्षत्र तड़के 03 बजकर 23 मिनट तक रहेगा और इसके बाद अश्विनी नक्षत्र का आरंभ होगा। चंद्रमा भी तड़के 03 बजकर 23 मिनट तक मीन राशि में रहेंगे, इसके बाद मेष राशि में प्रवेश करेंगे।
दिन में गंड योग दोपहर 01 बजकर 50 मिनट तक रहेगा। इसके बाद वृद्धि योग प्रभावी होगा। वहीं विष्टि (भद्रा) करण सुबह 08 बजकर 50 मिनट तक रहेगा और इसके बाद भाव करण शुरू होगा। सूर्य देव सिंह राशि में स्थित रहेंगे।
31 अगस्त का पंचांग
- वार: सोमवार
- मास: भाद्रपद
- पक्ष: कृष्ण पक्ष
- तिथि: तृतीया सुबह 08:50 बजे तक, इसके बाद चतुर्थी
- नक्षत्र: रेवती तड़के 03:23 बजे तक, इसके बाद अश्विनी
- योग: गंड दोपहर 01:50 बजे तक, इसके बाद वृद्धि
- करण: विष्टि (भद्रा) सुबह 08:50 बजे तक, इसके बाद भाव
- चंद्र राशि: मीन तड़के 03:23 बजे तक, इसके बाद मेष
- सूर्य राशि: सिंह
शुभ मुहूर्त
अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12:02 से 12:52 बजे तक
शुभ चौघड़िया
- शुभ: रात 12:21 से 01:44 बजे तक
- अमृत: सुबह 05:59 से 07:33 बजे तक
राहुकाल और अशुभ समय
31 अगस्त को राहुकाल सुबह 07 बजकर 42 मिनट से 09 बजकर 17 मिनट तक रहेगा। इस दौरान शुभ कार्यों की शुरुआत करने से बचने की परंपरा है।
- राहुकाल: सुबह 07:42 से 09:17 बजे तक
- दुर्मुहूर्त: दोपहर 12:47 से 01:38 बजे तक
- दुर्मुहूर्त: दोपहर 03:20 से 04:11 बजे तक
- वर्ज्यम्: दोपहर 03:34 से शाम 05:07 बजे तक
अन्य अशुभ समय
- चौघड़िया काल: रात 12:00 से 12:20 बजे तक
- चौघड़िया रोग: रात 01:45 से सुबह 04:33 बजे तक
- चौघड़िया काल: सुबह 07:34 से 09:09 बजे तक
- दुर्मुहूर्त: सुबह 10:45 से दोपहर 01:56 बजे तक
- दुर्मुहूर्त: दोपहर 03:20 से शाम 05:07 बजे तक
- चौघड़िया काल: रात 10:57 से 11:59 बजे तक
सूर्योदय और सूर्यास्त
- सूर्योदय: सुबह 06:07 बजे
- सूर्यास्त: शाम 06:47 बजे
अगले दिन के शुभ समय
पंचांग के अनुसार अगले दिन के लिए दिए गए अनुकूल समय इस प्रकार हैं :-
- चौघड़िया चर: सुबह 04:34 से 05:58 बजे तक
- रेवती, चतुर्थी: सुबह 09:10 से 10:44 बजे तक
- चौघड़िया चर: दोपहर 01:57 से 03:19 बजे तक
- चौघड़िया चर: शाम 05:08 से रात 10:56 बजे तक
हिंदू पंचांग में तिथि, नक्षत्र, योग और करण का विशेष महत्व माना गया है। भाद्रपद कृष्ण पक्ष में आने वाली तिथियों पर धार्मिक अनुष्ठान, पूजा-पाठ और व्रत आदि किए जाते हैं। किसी भी महत्वपूर्ण शुभ कार्य के लिए स्थानीय पंचांग तथा व्यक्ति की जन्मकुंडली के अनुसार मुहूर्त देखना अधिक उचित माना जाता है।
नोट: पंचांग के मुहूर्त और समय स्थान के अनुसार कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकते हैं। उपरोक्त विवरण उपलब्ध पंचांग गणना के अनुसार प्रस्तुत किया गया है।
