11 अगस्त को मनाई जाएगी सावन शिवरात्रि, कांवड़ यात्रा अपने चरम पर; देशभर के मंदिरों में विशेष तैयारियां
विनोद कुमार झा
सावन की रिमझिम फुहारों, कांवड़ियों के "बोल बम" के उद्घोष और शिवभक्तों की अटूट आस्था के बीच देश एक बार फिर भगवान भोलेनाथ की भक्ति में सराबोर होने जा रहा है। सावन शिवरात्रि का पावन पर्व इस वर्ष 11 अगस्त 2026 (मंगलवार) को मनाया जाएगा। इस अवसर पर देशभर के प्रमुख शिवालयों में विशेष पूजा-अर्चना, रुद्राभिषेक, जलाभिषेक और धार्मिक आयोजनों की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं।
भगवान आशुतोष को समर्पित यह पर्व सावन मास के सबसे महत्वपूर्ण उत्सवों में से एक माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत, पूजन और जलाभिषेक करने से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होकर भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।
सावन शिवरात्रि 2026 का शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार चतुर्दशी तिथि 10 अगस्त 2026 को शाम 6:24 बजे प्रारंभ होगी और 11 अगस्त 2026 को दोपहर 3:22 बजे समाप्त होगी। शिवभक्तों के लिए निशीथ काल पूजा का विशेष महत्व है, जिसका शुभ समय रात्रि 12:04 बजे से 12:47 बजे तक रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मध्यरात्रि में भगवान शिव की आराधना अत्यंत फलदायी मानी जाती है।
30 जुलाई से शुरू होगा सावन मास
श्रावण मास का शुभारंभ 30 जुलाई 2026, गुरुवार से होगा और इसका समापन 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को होगा। पूरे माह भगवान शिव के मंदिरों में विशेष अनुष्ठान, भजन-कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
सावन के प्रमुख सोमवार
- पहला सावन सोमवार – 3 अगस्त 2026
- दूसरा सावन सोमवार – 10 अगस्त 2026
- तीसरा सावन सोमवार – 17 अगस्त 2026
- चौथा सावन सोमवार – 24 अगस्त 2026
इन चारों सोमवार को शिवभक्त बड़ी संख्या में व्रत रखकर भगवान शिव की पूजा-अर्चना करेंगे।
काशी से केदारनाथ तक सज रहे शिवधाम
सावन शिवरात्रि को लेकर देश के प्रसिद्ध शिव मंदिरों में विशेष तैयारियां की जा रही हैं। काशी विश्वनाथ धाम, बाबा बैद्यनाथ धाम, महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग, केदारनाथ धाम, सोमनाथ मंदिर, त्र्यंबकेश्वर, ओंकारेश्वर, भीमाशंकर और लिंगराज मंदिर सहित प्रमुख शिवालयों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है।
मंदिर परिसरों को भव्य विद्युत सज्जा और फूलों से सजाया जा रहा है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए सुरक्षा व्यवस्था, बैरिकेडिंग, चिकित्सा शिविर, पेयजल और यातायात प्रबंधन के व्यापक इंतजाम किए जा रहे हैं।
गंगाजल लेकर शिवधाम पहुंचेंगे लाखों कांवड़िये
सावन माह में निकलने वाली कांवड़ यात्रा भारतीय धार्मिक परंपरा की सबसे विशाल यात्राओं में से एक मानी जाती है। लाखों श्रद्धालु हरिद्वार, गंगोत्री, ऋषिकेश, प्रयागराज, वाराणसी और बिहार के सुल्तानगंज सहित विभिन्न तीर्थस्थलों से पवित्र गंगाजल लेकर अपने-अपने क्षेत्र के शिव मंदिरों की ओर प्रस्थान करते हैं।
श्रद्धालु कई किलोमीटर की पदयात्रा कर भगवान शिव को गंगाजल अर्पित करते हैं। मान्यता है कि गंगाजल से जलाभिषेक करने पर भगवान भोलेनाथ विशेष रूप से प्रसन्न होते हैं और भक्तों को सुख, समृद्धि तथा आरोग्य का आशीर्वाद प्रदान करते हैं।
धार्मिक ग्रंथों में जलाभिषेक का महत्व
पुराणों और धार्मिक ग्रंथों के अनुसार समुद्र मंथन के समय निकले कालकूट विष को भगवान शिव ने सृष्टि की रक्षा के लिए अपने कंठ में धारण किया था। विष की उष्णता को शांत करने के लिए देवताओं ने उन पर जल अर्पित किया। तभी से भगवान शिव पर जलाभिषेक की परंपरा आरंभ हुई।
मान्यता है कि सावन मास में गंगाजल, दूध, दही, शहद, बेलपत्र, धतूरा और आक के पुष्प अर्पित करने से भगवान शिव अत्यंत प्रसन्न होते हैं। विशेष रूप से सावन शिवरात्रि पर किया गया रुद्राभिषेक और रात्रि जागरण भक्तों को आध्यात्मिक शक्ति और पुण्य प्रदान करता है।
शिवभक्ति का महासंगम बनेगा सावन शिवरात्रि पर्व
सावन शिवरात्रि केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति की जीवंत परंपरा, श्रद्धा और आध्यात्मिक चेतना का उत्सव है। इस दिन देशभर में शिवभक्त उपवास रखकर, मंदिरों में दर्शन कर और भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक कर सुख, शांति और समृद्धि की कामना करेंगे।
एक बार फिर "हर-हर महादेव" और "बोल बम" के जयघोष से पूरा देश शिवमय होगा तथा शिवालयों में उमड़ने वाली आस्था की अविरल धारा भगवान आशुतोष के प्रति करोड़ों श्रद्धालुओं के अटूट विश्वास को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगी।
हर-हर महादेव! जय भोलेनाथ!
